CBSE Class 12 Hindi Core

CBSE Class 12 हिंदी कोर
Sample Paper 01 (2020-21)

Maximum Marks: 80 Marks 
Time Allowed: 3 hours

General Instructions:

  1. इस प्रश्न पत्र में दो खंड हैं – खंड – अ  और खंड – ब। खंड-अ में वस्तुपरक तथा खंड-ब में वर्णात्मक प्रश्न पूछे गए हैं।
  2. खंड-अ में कुल 6 प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें कुछ प्रश्नों के वैकल्पिक प्रश्न भी सम्मिलित हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए ही प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  3. खंड-ब में कुल 8 प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें कुछ प्रश्नों के वैकल्पिक प्रश्न भी सम्मिलित हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए ही प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

 


  1. खंड-अ वस्तुपरक प्रश्न
  2. जाति-प्रथा को यदि श्रम-विभाजन मान लिया जाए, तो यह स्वाभाविक विभाजन नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित है। कुशल व्यक्ति या सक्षम श्रमिक-समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें, जिससे वह अपना पेशा या कार्य का चुनाव स्वयं कर सके। इस सिद्धांत के विपरीत जाति-प्रथा का दूषित सिद्धांत यह है कि इससे मनुष्य के प्रशिक्षण अथवा उसकी निजी क्षमता का विचार किए बिना, दूसरे ही दृष्टिकोण जैसे माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार पहले से ही अर्थात् गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।जाति-प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्व निर्धारण ही नहीं करती, बल्कि मनुष्य को जीवन-भर के लिए एक पेशे में बाँध भी देती है, भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए। आधुनिक युग में यह स्थिति प्रायः आती है, क्योंकि उद्योग-धंधे की प्रक्रिया व तकनीक में निरंतर विकास और कभी-कभी अकस्मात परिवर्तन हो जाता है, जिसके कारण मनुष्य को अपना पेशा बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है और यदि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो, तो इसके लिए भूखों मरने के अलावा क्या चारा रह जाता है? हिंदू धर्म की जाति-प्रथा किसी भी व्यक्ति को ऐसा पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती हैं, जो उसका पैतृक पेशा न हों, भले ही वह उसमें पारंगत है। इस प्रकार पेशा-परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति-प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।क) कुशल श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए क्या आवश्यक है ?
    1. जातीय जड़ता को त्यागना
    2. प्रांतीय समानता को त्यागना
    3. जातीय समानता को त्यागना
    4. समानता को त्यागना

    ख) जाति प्रथा का सिद्धांत दूषित है क्योंकि –

    1. वह व्यक्ति की क्षमता के अनुसार चुनाव पर आधारित है |
    2. वह व्यक्ति की क्षमता के अनुसार चुनाव पर आधारित नहीं है |
    3. वह माता – पिता की जाति पर अवलंबित नहीं है |
    4. वह माता – पिता की जाति पर निर्भर नहीं है |

    ग) जाति प्रथा मनुष्य के साथ क्या करती है ?

    1. उसे जीवनभर के लिए अलग – अलग पेशे से बांधती है |
    2. उसे जीवनभर के लिए एक ही पेशे से बाँधती है |
    3. उसे अलग – अलग पेशा निर्धारित करने की छूट प्रदान करती है |
    4. उसे एक ही पेशा निर्धारित करने की छूट नहीं होती है |

    घ) हमारे समाज में बेरोज़गारी बढ़ने के क्या कारण हैं ?

    1. उद्योग धंधों में निरंतर विकास
    2. व्यक्ति के द्वारा पेशा न बदल पाना
    3. व्यक्ति द्वारा नवीन तकनीक को नहीं अपना पाना
    4. सभी विकल्प सही हैं

    ड) अक्षम श्रमिक समाज का निर्माण है –

    1. जातिप्रथा का दोषपूर्ण पक्ष
    2. समानता का दोषपूर्ण पक्ष
    3. पेशे का निर्धारण
    4. व्यवसाय का निर्धारण

    च) जाति प्रथ किस प्रकार का विभाजन है ?

    1. पेशे पर आधारित
    2. रूचि पर आधारित
    3. समानता पर आधारित
    4. शैक्षिक गतिविधि पर आधारित

    छ) ‘श्रम – विभाजन में समास है –

    1. अव्ययीभाव समास
    2. कर्मधारय समास
    3. तत्पुरुष समास
    4. द्विगु समास

    ज) ‘स्वाभाविक’ में प्रयुक्त प्रत्यय है –

    1. इक
    2. स्व
    3. विक
    4. भाव

    झ) जाति प्रथा का दोषपूर्ण पक्ष है –

    1. पेशे का दोषपूर्ण निर्धारण
    2. पेशे का गुणपूर्ण निर्धारण
    3. पेशे का स्वाभाविक निर्धारण
    4. पेशे का इच्छानुसार निर्धारण

    ञ) गद्यांश का सर्वाधिक उचित शीर्षक होगा –

    1. जाति – प्रथा : एक दोषपूर्ण प्रणाली
    2. जाति प्रथा
    3. एक दोष
    4. एक प्रथा

    OR

    निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
    जब कोई वीर पुरुष किसी को क्षमा करता है तो वह सुनने और देखने में अच्छा लगता है। लेकिन जब कोई कायर और कमज़ोर व्यक्ति किसी को क्षमा करने की बात करता है, तो यह उपहास की बात हो जाती है। यदि हम अपने को बड़ा मानते हैं, हम बलशाली और विद्वान हैं, हम प्रबुद्ध हैं तो यही क्षमा हमारे जीवन का अलंकार बन जाता है। शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, बच्चों का काम होता है – भूल करना। यदि शिक्षक उन भूलों को क्षमा कर देते हैं तो यहाँ शिक्षक की गरिमा बढती है, मर्यादा बढती है। इससे उनको सही का परिचय मिलता है, पर यदि बच्चों को उनकी किसी प्रकार की छोटी – मोटी भूलों के लिए सज़ा दी जाए, उन्हें पीटा जाए, डांटा – फटकारा जाए, उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया जाए तो उस व्यक्ति या शिक्षक को हम क्षमाशील नहीं कह सकते। ऐसा करना हमारी भूल ही होगी।

    यह हमारी कौनसी महानता होगी कि किसी ने कुछ भूल कर दी औ हमने उसके बदले उसे दो हाथ लगा दिए। मनुष्य के समान कोई दूसरा आत्मघाती जीव इस संसार में मिलना मुश्किल है। इस संसार में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो केवल अपना ही नुकसान करने के पीछे पड़ा रहता है। इसके सिवाय संसार में ऐसा कोई ओर दूसरा जीव नहीं है जो अपना नुकसान स्वयं करने की ताक में लगा रहता हो। हम जो भूल करते चले आ रहे हैं, उससे हमारे शरीर का क्षय होता है, हमारा ही शरीर टूटता है, विकृत होता है पर फिर भी हम मनुष्य गलती पर गलती करते चले जाते हैं।

    1. कायर और कमज़ोर व्यक्ति का कौनसा कार्य उपहास का कारण बन जाता है?
      1. दूसरों का उपहास करना
      2. दूसरों की सेवा करना
      3. किसी को क्षमा करना
      4. डटकर मुकाबला करना
    2. क्षमा हमारे जीवन का अलंकार कब बनती है?
      1. जब हम किसी को क्षमा करते हैं
      2. बलवान, विद्वान और प्रबुद्ध होने पर भी दूसरों को क्षमा करना
      3. जब हम बढ़ा – चढ़ाकर बात करते हैं
      4. जब हम पूरी तरह कमज़ोर हों
    3. शिक्षक की गरिमा और मर्यादा कब बढती है?
      1. जब वह छात्रों को दंड देता है
      2. जब वह अपने काम को नौकरी समझता है
      3. जब वह छात्रों की भूलों को क्षमा कर देता है
      4. जब वह छात्रों की बात को अनसुनी कर देता है
    4. मनुष्य को आत्मघाती जीव क्यों कहा गया है ?
      1. क्योंकि वह सभी का हित चाहता है
      2. क्योंकि उसके समान हितकारी कोई नहीं है
      3. क्योंकि वह केवल अपना हित करता है
      4. क्योंकि वह हमेशा अपना नुकसान करने को तत्पर रहता है
    5. ‘गरिमा’ शब्द का विशेषण है –
      1. गौरव
      2. लघिमा
      3. गुरु, गरिमामय
      4. गरिमा वाला
    6. शिक्षक कब क्षमाशील नहीं होता ?
      1. जब वह बच्चों की गलती पर उन्हें सज़ा देता है
      2. जब वह बच्चों की गलती पर उन्हें सज़ा नहीं देता है
      3. जब वह अपनी मर्यादा को बढ़ाता है
      4. जब वह बच्चों को पढ़ाता है
    7. बच्चों का क्या काम होता है ?
      1. काम करना
      2. भूल करना
      3. खेलना
      4. पढ़ना
    8. ‘प्रबुद्ध’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है –
      1. बुद्ध
      2. प्र
      3. द्ध
      4. प्रबु
    9. गद्यांश में से ‘वृद्धि’ शब्द का विलोम छांटिए –
      1. विकृत
      2. क्षमा
      3. क्षय
      4. नुकसान
    10. गद्यांश के लिए उचित शीर्षक होगा –
      1. क्षमा
      2. क्षमाशील
      3. क्षमा : जीवन का अलंकार
      4. जीवन का अलंकार
  3. निम्नलिखित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
    पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
    पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।मेखलाकर पर्वत अपार
    अपने सहस्‍त्र दृग-सुमन फाड़,
    अवलोक रहा है बार-बार
    नीचे जल में निज महाकार,-जिसके चरणों में पला ताल
    दर्पण सा फैला है विशाल!गिरि का गौरव गाकर झर-झर
    मद में लनस-नस उत्‍तेजित कर
    मोती की लडि़यों सी सुन्‍दर
    झरते हैं झाग भरे निर्झर!गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
    उच्‍चाकांक्षायों से तरूवर
    है झॉंक रहे नीरव नभ पर
    अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर।उड़ गया, अचानक लो, भूधर
    फड़का अपार वारिद के पर!
    रव-शेष रह गए हैं निर्झर!
    है टूट पड़ा भू पर अंबर!

    धँस गए धरा में सभय शाल!
    उठ रहा धुऑं, जल गया ताल!
    -यों जलद-यान में विचर-विचर
    था इंद्र खेलता इंद्रजाल

    01. रव-शेष शब्द से क्या तात्पर्य है ?
    (क) निस्तब्ध वातावरण
    (ख) झरनों की आवाज
    (ग) नदी की आवाज
    (घ) झरने का बहना

    02. कवि ने मोतियों से किसकी तुलना की है ?
    (क) मोतियों की लड़ी से
    (ख) बिजली की चमक से
    (ग) झरने के पानी से
    (घ) पानी के झाग से

    03. भूधर शब्द का क्या अर्थ है ?
    (क) झरना
    (ख) बादल
    (ग) पहाड़
    (घ) नदी

    04. पर्वतीय इलाकों में किस ऋतु में हमेशा वातावरण परिवर्तित होता है ?
    (क) ग्रीष्म ऋतु
    (ख) वर्षा ऋतु
    (ग) शरद ऋतु
    (घ) वसंत ऋतु

    05. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर पंक्ति में अलंकार बतायें ।
    (क) उपमा
    (ख) अनुप्रास
    (ग) पुनरुक्तिप्रकाश
    (घ) रुपक

    OR

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उचित विकल्प चुनिए।
    इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी।
    जलकर जिसने स्वतंत्रता की दिव्य आरती. फेरी।।
    यह समाधि एक लघु समाधि है, झाँसी की रानी की।
    अन्तिम लीला-स्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की।।
    यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न विजयमाला सी।
    उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृतिशाला सी।।
    सहे वार पर वार अन्त तक, बढ़ी वीर बाला सी।
    आहुति सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला सी।
    बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से।
    मूल्यवती होती सोने की, भस्म यथा सोने से ॥
    रानी से भी अधिक हमें अब, यह समाधि है प्यारी।
    यहाँ निहित है स्वतंत्रता की, आशा की चिनगारी।।
    इससे भी सुन्दर समाधियाँ, हम जग में हैं पाते।
    उनकी गाथा पर निशीथ में, क्षुद्र जन्तु ही गाते।।

    1. काव्यांश में किसकी समाधि की बात हो रही है ?
      1. लक्ष्मीबाई की
      2. नौजवानों की
      3. युवाओं की
      4. शहीदों की
    2. ‘उसके फूल यहाँ संचित हैं’ – पंक्ति में फूल का क्या तात्पर्य है ?
      1. सूखे हुए फूल
      2. रानी की अस्थियाँ
      3. खिले हुए फूल
      4. चिता के अवशेष
    3. वीर का मान कब बढ़ जाता है?
      1. जब वह युद्ध लड़ता है।
      2. जब वह लड़ते हुए शहीद हो जाता है।
      3. जब वह युद्धभूमि से पलायन कर जाता है।
      4. जब वह युद्ध नहीं लड़ता है।
    4. रानी से अधिक उसकी समाधि प्रिय क्यों है?
      1. क्योंकि उससे स्वतंत्रता की प्रेरणा मिलती है।
      2. क्योंकि उससे रानी कि याद आती है।
      3. क्योंकि उससे वीर का मान बढ़ता है।
      4. क्योंकि वह चिता स्थल है।
    5. सोने की भस्म किससे मूल्यवान होती है?
      1. सोने से
      2. चाँदी से
      3. राख से
      4. फूलों से
  4. कार्यालयी हिंदी और रचनात्मक लेखन निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए।
    1. जनसंचार के प्रचलित माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम क्या है?
      1. वेब माध्यम
      2. इलैक्ट्रोनिक माध्यम
      3. मुद्रित माध्यम
      4. रेडियो माध्यम
    2. समाचार लेखन के कितने ‘क’ कार होते हैं?
      1. छह
      2. चार
      3. सात
      4. पाँच
    3. फ़ीचर लेखन के कितने प्रकार है?
      1. दस
      2. चार
      3. पाँच
      4. आठ
    4. बीट रिपोर्टिंग के लिए रिपोर्टर को किन शब्दों का ज्ञान होना चाहिए?
      1. साहित्यिक
      2. तकनीकी
      3. गंभीर
      4. अलंकार युक्त
    5. विभिन्न जनसंचार माध्यमों में क्या अंतर है?
      1. अलग समाचार
      2. एक लेखन शैली
      3. उनकी लेखन शैली
      4. अलग-अलग तथ्य
  5. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
    जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
    जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
    दिल में क्या झरना है?
    मीठे पानी का सोता है
    भीतर वह, ऊपर तुम
    मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात भर
    मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है

    1. प्रस्तुत काव्यांश के अनुसार कविता को क्या प्रभावशाली बनाता है?
      1. कविता प्रभावशाली नहीं है
      2. तुकबंदी
      3. छंदों का प्रयोग
      4. अर्थ की गतिशीलता
    2. भर-भर फिर आता है पंक्ति में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है?
      1. उत्प्रेक्षा अलंकार
      2. पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
      3. यमक अलंकार
      4. श्लेष अलंकार
    3. काव्यांश में चाँद से किसकी तुलना की है?
      1. खिलते हुए चेहरे की
      2. झरने की
      3. उजाले की
      4. वैभव की
    4. प्रस्तुत काव्यांश को  किस कविता से लिया गया है?
      1. उषा
      2. स्वीकारा है
      3. सहर्ष स्वीकारा है
      4. बादल राग
    5. इस कविता के कवि कौन हैं?
      1. शमशेर
      2. मुक्तिबोध
      3. रघुवीर सहाय
      4. निराला
  6. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    इस सद्भाव के ह्रास पुर आदमी आपस में भाई-भाई और सुहृद और पड़ोसी फिर रह ही नही जाते है और आपस में कोरे ग्राहक और बेचक की तरह व्यवहार करते हैं। मानो दोनो एक-दूसरे को ठगने की घात में हो। एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दिखता है। और यह बाजार का, बल्कि इतिहास का सत्य माना जाता है। ऐसे बाजार को बीच में लेकर लोगों में आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नही होता, बल्कि शोषण होने लगता, तब कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है। ऐसे बाज़ार मानवता के लिए विडंबना है।

    1. बाजार में सद्भाव का ह्रास तब होता है जब –
      1. लोग ग्राहक का व्यवहार करते हैं।
      2. लोग बेचक का व्यवहार करते हैं।
      3. लोग ग्राहक-बेचक का व्यवहार करते है।
      4. भृष्टाचार का जन्म
    2.  ग्राहक-विक्रेता के स्वभाव और व्यवहार में अंतर कब आ जाता है ?
      1. दूसरों की हानि में अपना लाभ
      2. दूसरों की हानि
      3. आपसी होड़
      4. दूसरों की हानि में लाभ और आपसी होड़ का भाव
    3.  ‘ऐसे बाजार को’ कथन से लेखक का क्या तात्पर्य है? वे मानवता के लिए विडंबना क्यों है?
      1. आवश्यकताओं की पूर्ति न होना
      2. शोषण
      3. छल-कपट की भावना
      4. शोषण, कपट, आवश्यकता से रहित बाजार
    4. ऐसे बाजार मानवता के लिए विडम्बना क्यों है?
      1. आवश्यकता का अभाव
      2. सदगुणों का ह्रास
      3. अधिक लाभ
      4. ग्राहकों की हानि
    5. ऐसे बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान किसका होता है?
      1. निर्दोष व्यक्ति का
      2. निर्दोष विक्रेता
      3. निर्दोष क्रेता
      4. क्रेता-विक्रेता
  7. निम्नलिखित प्रश्नों में निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए:
    1. यशोधर बाबु किस एरिया में रहते थे?
      1. लक्ष्मीबाई नगर
      2. पंडारा रोड
      3. पहाड़गंज
      4. गोल मार्केट
    2. यशोधर बाबू ने कहाँ से मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की थी?
      1. कानपुर
      2. पहाड़गँज
      3. दिल्ली
      4. अल्मोड़ा
    3. आने दे अब उसे, मैं उसे सुनाता हूँ कि नहीं अच्छी तरह, देख।
      उपरोक्त कथन किसका है? [जूझ]

      1. लेखक
      2. चह्वान
      3. आनंदा
      4. देसाई
    4. जूझ पाठ के मूल में क्या भाव है?
      1. लेखक का जूझना
      2. पढ़ाई
      3. खेती
      4. नौकरी
    5. अतीत में दबे पाँव पाठ के अनुसार हेरल्ड हरग्रीव्ज ने कब खुदाई करवाई थी?
      1. 1927-28
      2. 1934-35
      3. 1924-26
      4. 1924-25
    6. मोहनजोदड़ो के स्तूप वाले चबूतरे को क्या कहा जाता है? [अतीत में दबे पाँव]
      1. सतह
      2. गढ़
      3. केंद्र
      4. धर्मसत्ता
    7. अतीत में दबे पाँव पाठ के अनुसार कशीदेकारी क्या है?
      1. एक फूल
      2. एक घाटी
      3. एक नर्तकी
      4. एक कला
    8. डायरी के पन्ने पाठ में लेखिका के घर का किरायेदार कौन था?
      1. मार्गोट
      2. गोल्डश्मिड्ट
      3. जॉन
      4. किट्टी
    9. डायरी के पन्ने पाठ के अनुसार मिएप लेखिका के पिता की कंपनी में कब से काम कर रही थी?
      1. 1933
      2. 1928
      3. 1930
      4. 1937
    10. स्मृतियाँ मेरे लिए पोशाकों की तुलना में ज़्यादा मायने रखती हैं।
      प्रस्तुत कथन किसका है? [डायरी के पन्ने]

      1. मार्गोट
      2. ऐन फ्रैंक
      3. मिस्टर वान दान
      4. हैलो
  8. खंड-ब वर्णात्मक प्रश्न
  9. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लिखिये:
    1. युवा असंतोष विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
    2. मनोरंजन के आधुनिक साधन विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
    3. छोटे परिवार के सुख-दुख विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
  10. आपके क्षेत्र की कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ गई है कि हर व्यक्ति अपने को असुरक्षित महसूस करता है। इसके कारणों की चर्चा करते हुए समाधान हेतु पुलिस आयुक्त को पत्र।ORदूरदर्शन पर किशोरों के लिए उपयुक्त कार्यक्रम भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं हैं। अंग्रेज़ी के डब किए हुए कार्यक्रम भारतीय सामजिक परिवेश के अनुकूल नहीं होते। इस समस्या पर ध्यान आकृष्ट करते हुए निदेशक, समाचार भारती को पत्र लिखिए।
  11. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 40-50 शब्दों में दीजिये: (3+2)
    1. रेडियो नाटक के लिखन तथा रगमंच के लेखन किस प्रकार एक दूसरे से भिन्न व समान है?
      OR
      कहानी लेखन में कथानक के पत्रों का संबंध स्पष्ट कीजिए।
    2. नाटक लेखन की कार्य अवस्थाएँ किस प्रकार होती हैं?
      OR
      कविता के किन प्रमुख घटको का ध्यान रखना चाहिए?
  12. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 40-50 शब्दों में दीजिये: (3+2)
    1. बीट लेखन के समय संवाददाता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
      OR
      नेट साउन्ड किसे कहा जाता है?
    2. हिंदी के दो समाचार-पत्रों के नाम लिखिए, जिनके इंटरनेट संस्करण भी उपलब्ध हों।
      OR
      विशेष लेखन क्या है?
  13. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 50-60 शब्दों में दीजिये:
    1. कैमरे में बंद अपाहिज कविता कुछ लोगों की संवेदनहीनता प्रकट करती है, कैसे?
    2. सूर्योदय होने के साथ ही उषा का जादू किस प्रकार टूटने लगता है?
    3. तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?
      धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ / काहू की बेटी सों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ।
      इस सवैया में काहू के बेटा सों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?
  14. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 30-40 शब्दों में दीजिये:
    1. सहर्ष स्वीकारा है के कवि ने जिस चाँदनी को सहर्ष स्वीकारा था, उससे मुक्ति पाने के लिए वह अंग-अंग में अमावस की चाह क्यों कर रहा है?
    2. गोरखपुरी की रुबाइयों के कला पक्ष के बारे में बताएँ।
    3. लक्ष्मण मूर्च्छा और राम का विलाप कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
  15. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 50-60 शब्दों में दीजिये:
    1. भक्तिन ने महादेवी वर्मा के जीवन पर कैसे प्रभावित किया ?
    2. काले मेघा पानी दे संस्मरण के लेखक ने लोक- प्रचलित विश्वासों को अंधविश्वास कहकर उनके निराकरण पर बल दिया है।- इस कथन की विवेचना कीजिए।
    3. जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?
  16. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 30-40 शब्दों में दीजिये:
    1. बाज़ार दर्शन निबंध की भाषा के बारे में बताइए।
    2. लुट्टन सिंहराज पहलवान कैसे बना?
    3. नमक पाठ में सिख बीबी की शारीरिक बनावट के बारे में लेखिका ने क्या कहा है?

12 Hindi Core SP-01
Class 12 – हिंदी कोर


Solution

  1. खंड-अ वस्तुपरक प्रश्न
  2. क) 1 जातीय जड़ता को त्यागना |ख) 2 वह व्यक्ति की क्षमता के अनुसार चुनाव पर आधारित नहीं है |ग) 2 उसे जीवनभर के लिए एक ही पेशे से बाँधती है |घ) 4 सभी विकल्प सही हैं |ड) 1 जातिप्रथा का दोषपूर्ण पक्ष |च) 2 रूचि पर आधारित |

    छ) 3 तत्पुरुष समास |

    ज) 1 इक |

    झ) 1 पेशे का दोषपूर्ण निर्धारण |

    ञ) जाति प्रथा : एक दोषपूर्ण प्रणाली |

    OR

    1. (iii) किसी को क्षमा करना
    2. (ii) बलवान, विद्वान और प्रबुद्ध होने पर भी दूसरों को क्षमा करना
    3. (iii) जब शिक्षक छात्रों की भूलों को क्षमा कर देता है
    4. (iv) क्योंकि वह हमेशा अपना नुकसान करने को तत्पर रहता है
    5. (iii) गुरु, गरिमामय
    6. (i) जब वह बच्चों की गलती पर उन्हें सज़ा देता है
    7. (ii) भूल करना
    8. (ii) प्र
    9. (iii) क्षय
    10. (iii) क्षमा : जीवन का अलंकार
  3. 01.  (क) निस्तब्ध वातावरण02.  (घ) पानी के झाग से03.  (ग) पहाड़04.  (ख) वर्षा ऋतु05.  (ग) पुनरुक्तिप्रकाशOR
    1. (i) लक्ष्मीबाई की
    2. (i) रानी की अस्थियाँ
    3. (ii) जब वह लड़ते हुए शहीद हो जाता है।
    4. (i) क्योंकि उससे स्वतंत्रता की प्रेरणा मिलती है।
    5. (i) सोने से
  4. कार्यालयी हिंदी और रचनात्मक लेखन निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए।
    1. (c) मुद्रित माध्यम
      Explanation: प्रिंट यानी मुद्रित माध्यम जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में से सबसे पुराना है। आधुनिक युग का प्रारंभ छपाई के आविष्कार से हुआ।
    2. (a) छह
      Explanation: समाचार में छह तत्वों का समावेश अनिवार्य माना जाता है। ये हैं – क्या, कहां, कब, कौन, क्यो और कैसे।
    3. (d) आठ
      Explanation: फ़ीचर के प्रकार निम्नलिखित हैं

      1. समाचार फीचर
      2. घटनापरक फीचर
      3. व्यक्तिपरक फीचर
      4. लोकाभिरुचि फ़ीचर
      5. सांस्कृतिक फ़ीचर
      6. साहित्यिक प्रफीचर
      7. विश्लेषण प्रफीचर
      8. विज्ञान फ़ीचर
    4. (b) तकनीकी
      Explanation: रिपोर्टर को संबंधित विषयों के प्रयोग होने वाले तकनीकी शब्द का ज्ञान होना आवश्यक है।
    5. (c) उनकी लेखन शैली
      Explanation: विभिन्न जनसंचार माध्यमों में लेखन शैली और समाचारों को प्रस्तुत करने के अलग-अलग तरीके होते हैं।
    1. (iv) अर्थ की गतिशीलता
    2. (ii) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
    3. (i) खिलते हुए चेहरे की
    4. (iii) सहर्ष स्वीकारा है
    5. (ii) मुक्तिबोध
    1. (ii) लोग  ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं।
    2. (iv) दूसरों की हानि में लाभ और आपसी होड़ का भाव
    3. (iv) शोषण,कपट,आवश्यकता से रहित बाजार
    4. (ii) सद्गुणों का ह्रास
    5. (iv) क्रेता-विक्रेता
  5. निम्नलिखित प्रश्नों में निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए:
    1. (d) गोल मार्केट
      Explanation: यशोधर पंत गोल मार्केट एरिया में सरकारी आवास में रहते थे, जो सरकार की तरफ से उनको मिला था। उनके साथ उनकी पत्नी, बड़ा बेटा और बेटी रहा करते थे।
    2. (d) अल्मोड़ा
      Explanation: पाठ के अनुसार यशोधर बाबू ने रेम्जे स्कूल, अल्मोड़ा से अपनी मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। उसके बाद वे दिल्ली चले आए।
    3. (d) देसाई
      Explanation: उपरोक्त कथन दत्ता जी राव देसाई का है। यह कथन उन्होंने लेखक और उसकी माँ से लेखक के पिता के विषय में कहा है।
    4. (a) लेखक का जूझना
      Explanation: ‘जूझ’ पाठ के मूल में लेखक का अपने पढ़ाई को लेकर के जूझना है, किस प्रकार वो पढ़ाई से जुड़ता चला जाता है। इसी कारण पाठ का नाम भी जूझ ही है।
    5. (d) 1924-25
      Explanation: पाठ के अनुसार हेरल्ड हरग्रीव्ज ने 1924-1925 में मोहनजोदड़ो में खुदाई करवाई थी। इसीलिए इस हलके का नाम उन्हीं के नाम पर ‘एचआर’ हलका रखा गया।
    6. (b) गढ़
      Explanation: पाठ के अनुसार मोहनजोदड़ो के स्तूप वाले चबूतरे को गढ़ कहा जाता है। यह इसके सबसे खास हिस्से के एक सिरे पर स्थित है।
    7. (d) एक कला
      Explanation: पाठ के अनुसार कशीदेकारी एक प्रकार की कला है, जिसमें कपड़ों पर बुन कर फूल अथवा कोई चित्र अंकित किया जाता है।
    8. (b) गोल्डश्मिड्ट
      Explanation: पाठ के अनुसार लेखिका के घर के ऊपरी मंजिल में गोल्डश्मिड्ट नाम का एक किरायेदार रहता था। वह एक तीस वर्षीय विधुर था।
    9. (a) 1933
      Explanation: पाठ के अनुसार मिएप लेखिका के पिता की कंपनी में वर्ष 1933 से काम कर रही थी। इसी कारण वो और उसके पति जॉन लेखिका के पिता के अच्छे मित्र थे।
    10. (b) ऐन फ्रैंक
      Explanation: प्रस्तुत कथन पाठ की लेखिका ऐन फ्रैंक का है। उनके अनुसार स्मृतियों का महत्व किसी भी चीज से ऊपर है।
  6. खंड-ब वर्णात्मक प्रश्न
  7. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लिखिये:
    1. युवा असंतोषआज चारों तरफ असंतोष का माहौल है। बच्चे-बूढ़े, युवक-प्रौढ़, स्त्री-पुरुष, नेता-जनता सभी असंतुष्ट हैं। युवा वर्ग विशेष रूप से असंतुष्ट दिखता है। घर-बाहर सभी जगह उसे किसी-न-किसी को कोसते हुए देखा-सुना जा सकता है। अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसका एक ही कारण नजर आता है नेताओं के खोखले आश्वासन।नेता अपने खोखले वादों से युवाओं को भरमाकर उन्हें बेरोजगारी की ओर धकेल देते हैं। युवा वर्ग को शिक्षा ग्रहण करते समय बड़े-बड़े सब्ज़बाग दिखाए जाते हैं,और जब उनकी शिक्षा पूर्ण होती है, तो वे बेरोजगारी की भीड़ में पीस जाते हैं।वह मेहनत से डिग्रियाँ हासिल करता है, परंतु जब वह व्यावहारिक जीवन में प्रवेश करता है तो खुद को पराजित पाता है। उसे अपनी डिग्रियों की निरर्थकता का अहसास हो जाता है। इनके बल पर रोजगार नहीं मिलता। इसके अलावा, हर क्षेत्र में शिक्षितों की भीड़ दिखाई देती है। वह यह भी देखता है कि जो सिफ़ारिशी है, वह योग्यता न होने पर भी मौज कर रहा है वह सब कुछ प्राप्त कर रहा है जिसका वह वास्तविक अधिकारी नहीं है।इस कारण से युवाओं में एक अलग प्रकार का आक्रोश रहता है।इनकी शान-शौकत भरी बनावटी जिंदगी आम युवा में हीनता का भाव जगाकर उन्हें असंतुष्ट बना देती है। ऐसे में जब असंतोष, अतृप्ति, लूट-खसोट, आपाधापी आज के व्यावहारिक जीवन का स्थायी अंग बन चुके हैं तो युवा से संतुष्टि की उम्मीद कैसे की जा सकती है? समाज के मूल्य भरभराकर गिर रहे हैं, अनैतिकता सम्मान पा रही है, तो युवा मूल्यों पर आधारित जीवन जीकर आगे नहीं बढ़ सकते।
    2. मनोरंजन के आधुनिक साधनप्राचीन काल में मनोरंजन के साधन प्राकृतिक वस्तुएँ और मनुष्य के निकट रहने वाले जीव-जंतु थे। इसके अलावा वह पत्थर के टुकड़ों, कपड़े की गेंद, गुल्ली-डंडा, दौड़, घुड़दौड़ आदि से भी अपना मनोरंजन करता था। किंतु मनुष्य ने ज्यों-ज्यों सभ्यता की दिशा में कदम बढ़ाए, त्यों-त्यों उसके मनोरंजन के साधनों में भी बढ़ोत्तरी और बदलाव आता गया। आज प्रत्येक आयुवर्ग की रुचि के अनुसार मनोरंजन के साधन उपलब्ध हैं, जिनका प्रयोग करके लोग आनंदित हो रहे हैं।लेकिन जैसे-जैसे मनोरंजन के साधनों में बढ़ोतरी हुई है, वैसे-वैसे हमारे मानवीय मूल्यों में गिरावट आई है।मनोरंजन के आधुनिक साधनों में रेडियो सबसे लोकप्रिय सिद्ध हुआ। आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों की स्थापना और उन पर प्रसारित क्षेत्रीय भाषाओं के कार्यक्रमों ने इसकी आवाज को घर-घर तक पहुँचाया।रेडियो के पश्चात टीवी ने भी मनोरंजन के क्षेत्र में एक आवश्यक भूमिका निभाई।शिक्षित वर्ग के मनोरंजन के अन्य साधन हैं-पुस्तकालय में विभिन्न प्रकार की पुस्तकें पढ़ना तथा उनसे आनंद प्राप्त करना या कवि-सम्मेलन, नाट्यमंचन, मुशायरे के आयोजन में भाग लेना आदि। वर्तमान काल में विज्ञान की प्रगति के कारण मोबाइल फोन में ऐसी तकनीक आ गई है, जिससे गीत-संगीत सुनने, फ़िल्में देखने का काम अपनी इच्छानुसार किया जा सकता है। इस प्रकार मनोरंजन की दुनिया सिमटकर मनुष्य की जेब में समा गई है। निष्कर्षत: आज अपनी आय के अनुसार व्यक्ति अपना मनोरंजन कर सकता है क्योंकि मनोरंजन की दुनिया बहुत विस्तृत हो चुकी है।
    3. छोटे परिवार के सुख-दुखमानव सभ्यता के विकास के साथ जीवन-यापन में कठिनाई आती जा रही है। आज जीवन-यापन के साधन अत्यंत महँगे होते जा रहे हैं। इस कारण परिवारों का निर्वाह मुश्किल से हो रहा है। इस समस्या का मूल खोजने पर पता चलता है कि जनसंख्या-वृद्धि के अनुपात में जीवनोपयोगी वस्तुओं एवं साधनों में वृद्धि नहीं हुई है। अतः हर देश में परिवारों को छोटा रखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। किंतु छोटे परिवार के साथ सुख-दुख दोनों जुड़े हैं। हालाँकि छोटे परिवार के सुखी होने के पीछे अनेक तर्क दिए जाते हैं।
      सर्वप्रथम, छोटे परिवार में सुखदायक संसाधन आसानी से उपलब्ध कराए जा सकते हैं। यदि कोई कठिनाई आती है तो उसका निराकरण अधिक कठिन भी नहीं होता। बड़े परिवार के लिए स्थितियाँ अत्यंत विकट हो जाती है। आधुनिक समय में रोजगार, मकान आदि की व्यवस्था बेहद महँगी होती जा रही है। इन्हीं सब कारणों से छोटा परिवार सुखी माना जाता है।इनके अलावा अन्य कई तरह के फायदे हैं एक छोटे परिवार से।
      वहीं दूसरी तरफ छोटे परिवार में अनेक प्रकार की खामियाँ भी है । छोटे परिवार में सुविधाएँ होती हैं, परंतु अपनापन नहीं होता। छोटे परिवार का व्यक्ति सामाजिक नहीं हो पाता। वह अहं भाव से पीड़ित होता है। इसके अलावा, बीमारी या संकट के समय जहाँ बड़े परिवार की जरूरत होती है, छोटा परिवार कभी खरा नहीं उतरता।
  8. परीक्षा भवन
    जयपुर
    दिनांक: 1 अप्रैल 20XX
    पुलिस आयुक्त
    जयपुर (राजस्थान)
    विषय- बिगड़ती कानून-व्यवस्था के संबंध में।
    महोदय,
    इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
    इस क्षेत्र के निवासी भय के साये में रहने को विवश हैं। कुछ शरारती तत्व छीना-झपटी करते हैं। वे स्थानीय दुकानदारों व रेहड़ी वालों से हफ़्ता-वसूली भी करते हैं। उनकी माँग पूरी न करने पर वे मारपीट करते हैं। सूरज छिपने के बाद सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है, गलियों में चोरी की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय पुलिस के पास शिकायत की जाती है तो वे ऊपर के दबाव या रिश्वत के कारण उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करते। शाम को बस स्टैंड के पास कुछ असामाजिक तत्व खड़े रहते हैं। वे आती-जाती महिलाओं एवं लड़कियों पर अश्लील फ़ब्तियाँ कसते हैं। सायं सात-आठ बजते ही ये लोग यात्रियों के सामान एवं रुपये-पैसे छीन लेते हैं तथा विरोध करने पर चाकू मारने का दुस्साहस कर बैठते हैं। ऐसे माहौल में कोई रहना नहीं चाहेगा।
    अतः मेरा आपसे अनुरोध है कि आप यथाशीघ्र इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करें। आशा है कि आप इस समस्या पर गंभीरता से विचार करेंगे तथा ठोस कदम उठाएँगे ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।
    सधन्यवाद
    भवदीय
    गोविन्द मल्होत्राORगाँधी नगर, दिल्ली
    7 अप्रैल, 2019
    सेवा में,
    समाचार-भारती
    नई दिल्ली।
    विषय- किशोरों के लिए भारतीय भाषाओं में उपयुक्त कार्यक्रम उपलब्ध नहीं
    महोदय,
    मैं एक दर्शक होने के नाते बड़े खेद के साथ लिख रहा हूँ कि आपके द्वारा प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों में किशोरों के लिए कोई भी कार्यक्रम ऐसा नहीं है, जो मौलिक रूप से भारतीय भाषाओं में निर्मित किया गया हो। किशोरों के लिए दिखाए जाने वाले कार्यक्रम एक तो बहुत कम दिखाए जाते हैं और जो दिखाए जाते हैं, वे भी भारतीय भाषाओं में न होकर मौलिक रूप से अंग्रेज़ी भाषा में बने होते हैं, जिनका ‘डब’ किया हुआ संस्करण प्रसारित किया जाता है। अंग्रेज़ी के ‘डब’ किए हुए कार्यक्रम भारतीय सामाजिक परिवेश से जुड़े नहीं होते हैं, इसी कारण वे भारतीय सामाजिक परिवेश के अनुकूल भी नहीं होते। ऐसे कार्यक्रमों को देखने वाले पर कोई गहरा प्रभाव भी नहीं पड़ता है।
    जब तक कोई व्यक्ति घटनाओं से स्वयं को नहीं जोड़ेगा, उसके साथ आत्मीयता स्थापित नहीं कर पाएगा, तब तक वह उसे आत्मसात् भी नहीं कर सकता। बाहरी सामाजिक परिवेश से संबंधित होने के कारण इन कार्यक्रमों का युवाओं पर यथेष्ट प्रभाव नहीं पड़ता। मैं ऐसा नहीं कहता कि आप अंग्रेजी से डब किये हुए कार्यक्रम न दिखाएँ, पर इतना ज़रूर कहूँगा कि प्राथमिकता भारतीय भाषाओं को देनी चाहिए । क्योंकि अपनी भाषा का प्रभाव बहुत जल्द और अधिक पड़ता है।
    अतः आपसे निवेदन है कि किशोरों के लिए दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में ऐसे कार्यक्रमों का ही प्रसारण करें जिनका संबंध भारतीय सामाजिक परिवेश से हो। इसके लिए आवश्यक है कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय भाषाओं में ही उपलब्ध कराए जाएँ तथा उन्हें ही प्रसारित किया जाए, जिससे किशोरों पर उनका यथेष्ठ प्रभाव पड़ सके।
    धन्यवाद
    भवदीय
    सुमन
  9. निम्नलिखित में से 2 प्रश्नों के उत्तर 40-50 शब्दों में दीजिये: (3+2)
    1. रेडियो नाटक तथा सिनेमा या रंगमंच माध्यम में रेडियो पूरी तरह से श्रव्य माध्यम है इसीलिए रेडियो नाटक का लेखन सिनेमा व रंगमंच लेखन से थोड़ा भिन्न भी है और थोड़ा मुश्किल भी। आपको सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों माध्यम से संप्रेषित करना होता है। यहाँ आपकी सहायता लिए न मंच सज्जा तथा वस्त्रा सज्जा है और न ही अभिनेता चेहरे की भाव-भंगिमाएँ। वरना बाकी सब कुछ वैसा ही है। एक कहानी, कहानी का वही ढाँचा, शुरुआत-मध्य-अंत, इसे यूँ भी कह सकते हैं, परिचय-द्वंद्व-समाधान। बस ये सब होगा आवाश माध्यम से।
    2. देशकाल, स्थान और परिवेश के बाद कथानक के पत्रों पर विचार करना चाहिए। हर पात्र का अपना स्वरूप, स्वभाव और उद्देश्य होता है। कहानी में वह विकसित भी होता है या अपना स्वरूप भी बदलता है। कहानीकार के सामने पत्रों का स्वरूप जितकारण पत्नारों का अध्ययन कहानी की एक बहुत महत्त्वपूर्ण और बुनियादी शर्त है। इसके स्पष्ट होगा उतनी ही आसानी उसे पत्रों का चरित्र-चित्रण करने और उसके संवाद लिखने में होगी। इसके अंतगर्त पात्रो के अंत संबंध पर भी विचार किया जाना चाहिए। कौन-से पात्र की किस किस परिस्थिति में क्या प्रतिक्रिया होगी, यह भी कहानीकार को पता होना चाहिए।
    3. नाटक में आरंभ से लेकर अंत तक पाँच कार्य अवास्थाए होती हैं, आरंभ, यत्न, प्राप्त्याशा, नियताप्ति और फलागम आरंभ-कथानक का आरंभ होता है और फलप्राप्ति की इच्छा जाग्रत होती है।
      आरंभ – इसमें किसी भी तरह के नाटक की शुरुआत की जाती हैं।
      यत्न – इसमें फलप्राप्ति की इच्छा को पूर्ण करने के लिए प्रयत्न किए जाते हैं।
      प्राप्त्याशा – इसमें फलप्राप्ति की आशा उत्पन्न होती है।
      नियताप्ति – इसमें फलप्राप्ति की इच्छा निश्चित रूप ले लेती है।
      फलागम आरंभ – इसमें फलप्राप्ति हो जाती है।
    4. कविता भाषा में होती है इसलिए भाषा का सम्यक ज्ञान जरूरी है भाषा सब्दो से बनती है शब्दों का एक विन्यास होता है जिसे वाक्य कहा जाता है भाषा प्रचलित एवं सहज हो पर संरचना ऐसी कि पाठक को नई लगे कविता में संकेतो का बड़ा महत्व होता है इसलिए चिह्नों (, !,।) यहाँ तक कि दो पंक्तियों के बीचका खाली स्थान भी कुछ कह रहा होता है वाक्य-गठन की जो विशिष्ट प्रणालियाँ होती हैं, उन्हें शैली कहा जाता है इसलिए विभिन्न काव्य-शैलियों का ज्ञान भी जरुरी है। शब्दों का चयन, उसका गठन और भावानुसार लयात्मक अनुशासन वे तत्व हैं जो जीवन के अनुशासन की लिए जरुरी हैं।
  10. निम्नलिखित में से 2 प्रश्नों के उत्तर 40-50 शब्दों में दीजिये: (3+2)
    1. संवाददाता  को बीट लेखन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –
      1. बीट लेखन विशेष प्रकार की रिपोर्टिंग होती है जिसके अंतर्गत संवाददाता को संबंधित विषय की गहरी जानकारी होनी चाहिए।
      2. रिपोर्टिंग से संबंधित विषय की तकनीकी भाषा -शैली पर भी उसका अधिकार होना चाहिए।
    2. वैसी आवाजें जो न्यूज का विडिओ शूट करते हुए अपने आप रिकार्ड हो जाती हैं, उन्हें नेट साउन्ड अथवा नेट कहते हैं। टी वी के लिए खब लिखते हुए इनका ध्यान रखना पड़ता है। इसे प्राकृतिक आवाज़ भी कहते हैं। इसके उदाहरण हैं – चिड़ियों का चहचहाना, गाड़ियों की आवाज आदि।
    3. नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स।
    4. विशेष लेखन का संबंध जटिल क्षेत्र से जुड़ी हुई घटनाओं और मुद्दों से होता है। जिन्हें आम पाठकों के लिए समझना कठिन होता है। विशेष लेखन की कोई निश्चित शैली नहीं होती है।
  11. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 50-60 शब्दों में दीजिये:
    1. कैमरे में बंद अपाहिज कविता कुछ लोगों की संवेदनहीनता प्रकट करती है क्योंकि ऐसे लोग धन कमाने एवं अपने कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं और किसी की करुणा और मजबूरी बेचकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं। ऐसे लोग अपाहिजों से कोई सहानुभूति नहीं रखते बल्कि वे अपने कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए उलटे-सीधे प्रश्न पूछते हैं।
    2. उषाकाल में प्रकृति का रंग अपने सौंदर्य को विविध रूपों में प्रदर्शित करता है। आकाश अपने रंग-रूप में प्रतिक्षण नवीन परिवर्तन कर रहा होता है। सूर्योदय के बाद आकाश में सूर्य की तेज किरणे छिटक कर अपना प्रकाश बिखेर देती हैं, जिसके प्रभाव से आकाश का नीला रंग मिट जाता है। उसकी आर्द्रता शुष्कता में परिवर्तित हो जाती है। इस प्रकार उषा का सम्मोहन अर्थात् जादू टूटने लगता है।
    3. तुलसी इस सवैये में यदि अपनी बेटी की शादी की बात करते तो सामाजिक संदर्भ में अंतर आ जाता क्योंकि विवाह के बाद बेटी को अपनी जाति छोड़कर अपनी पति की जाति अपनानी पड़ती है। दूसरे यदि तुलसी अपनी बेटी की शादी न करने का निर्णय लेते तो इसे भी समाज में गलत समझा जाता और तीसरे यदि किसी अन्य जाति में अपनी बेटी का विवाह संपन्न करवा देते तो इससे भी समाज में एक प्रकार का जातिगत या सामाजिक संघर्ष बढ़ने की संभावना पैदा हो जाती।
  12. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 30-40 शब्दों में दीजिये:
    1. कवि अपनी प्रियतमा के अतिशय स्नेह, भावुकता के कारण डर गया है। उसे आने वाला कल डराता है। अब वह अकेले जीना चाहता है ताकि मुसीबत आने पर उसका सामना कर सके। वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है। यह तभी हो सकता है, जब वह प्रियतमा के स्नेह से मुक्ति पा सके। अत: वह अपने अंग-अंग में अमावस की चाह कर रहा है ताकि प्रिया के स्नेह को भूल सके।
    2. गोरखपुरी की रूबाइयाँ कलापक्ष की दृष्टि से बेहतरीन बन पड़ी हैं। भाषा सहज, सरल और प्रभावी हैं। भावानुकूल शैली का प्रयोग हुआ है। उर्दू शब्दावली के साथ-साथ शायर ने देशज संस्कृत के शब्दों का प्रयोग भी स्वाभाविक ढंग से किया है। लोका, पिन्हाती, पुते, लावे आदि शब्दों के प्रयोग से उनकी रुबाइयाँ अधिक प्रभावी बन पड़ी हैं।
    3. लक्ष्मण को मुर्च्छित देखकर राम भावविह्वल हो उठते हैं। वे आम व्यक्ति की तरह विलाप करने लगते हैं। वे लक्ष्मण को अपने साथ लाने के निर्णय पर भी पछताते हैं। वे लक्ष्मण के गुणों को याद करके रोते हैं कि पुत्र, नारी, धन, परिवार आदि तो संसार में बार-बार मिल जाते हैं, किंतु लक्ष्मण जैसा भाई दोबारा नहीं मिल सकता। लक्ष्मण के बिना वे स्वयं को पंख कटे पक्षी के समान असहाय, मणि रहित साँप के समान तेज रहित तथा सूँड रहित हाथी के समान असक्षम मानते हैं। वे इस चिंता में थे कि अयोध्या में सुमित्रा माँ को क्या जवाब देंगे तथा लोगों का उपहास कैसे सुनेंगे कि पत्नी के लिए भाई को खो दिया।
  13. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 50-60 शब्दों में दीजिये:
    1. भक्तिन के साथ रहकर महादेवी की जीवन-शैली सरल हो गयी, वे अपनी सुविधाओं की चाह को छिपाने लगीं और असुविधाओं को सहने लगीं। भक्तिन ने उन्हें देहाती भोजन खिलाकर उनका स्वाद बदल दिया। भक्तिन मात्र एक सेविका न होकर महादेवी की अभिभावक और आत्मीय बन गयी। भक्तिन, महादेवी के जीवन पर छा जाने वाली एक ऐसी सेविका है जिसे लेखिका नहीं खोना चाहती।
    2. लेखक ने इस संस्मरण में लोक प्रचलित विश्वासों को अंधविश्वास कहा है। पाठ में इंदर सेना के कार्य को वे पाखंड मानते हैं। आम व्यक्ति इंदर सेना के कार्य को अपने-अपने तर्कों से सही मानता है, पंरतु लेखक इन्हें गलतबताता है।गरमी के मौसम में पानी की भारी कमी होती है। तब पानी को बिना मतलब फेंकना भयंकर क्षति है ऐसे ही अंधविश्वासों के कारण देश का बौद्धिक विकास नहीं हो पाता और उसकी प्रगति में अवरोध होता है।
    3. जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर ने निम्न तर्क दिए हैं-
      1. श्रम-विभाजन मनुष्य की रुचि पर नहीं बल्कि उसके जन्म पर आधारित है और यह विभाजन अस्वाभाविक होता है।
      2. व्यक्ति की योग्यता और क्षमताओं की उपेक्षा की जाती है।
      3. व्यक्ति के जन्म से पहले ही उसके माता-पिता के सामाजिक स्तर के आधार पर उसका पेशा निर्धारित कर दिया जाता है। उसे पेशा चुनने की कोई आज़ादी नहीं होती।
      4. व्यक्ति को अपना व्यवसाय बदलने या चुनने की अनुमति नहीं होती।
      5. संकट में भी व्यवसाय बदलने की अनुमति नहीं होती चाहे बेरोजगारी या भूखे मरने की नौबत ही क्यों न आ जाए।
  14. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही दो के उत्तर 30-40 शब्दों में दीजिये:
    1. बाजार दर्शन जैनेंद्र द्वारा लिखा गया एक सार्थक निबंध है। इसमें निबंधकार ने सहज, सरल और प्रभावी भाषा का प्रयोग किया है। शब्दावली में कुछेक अन्य भाषाओं के शब्द भी आए हैं। लेकिन ये शब्द कठिन नहीं हैं। पाठक सहजता से इन्हें ग्रहण कर लेता है। भाषा की दृष्टि से यह एक सफल और प्रभावशाली निबंध है। वाक्य छोटे-छोटे हैं जो निबंध को अधिक संप्रेषणीय बनाते हैं।
    2. श्यामनगर के राजा कुश्ती के शौकीन थे। उन्होंने दंगल का आयोजन किया। पहलवान लुट्टन सिह भी दंगल देखने पहुँचा।उस समय अखाड़े में  शेर के बच्चे के नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान अखाड़े मे अकेला गरज रहा था। लुट्टन सिंह ने चाँदसिंह को चुनौती दी और उस से भिड़ गया। ढोल की आवाज सुनकर लुट्टन की नस-नस में जोश भर गया। उसने चाँदसिंह को चारों खाने चित कर दिया। राजासाहब ने लुट्टन की शक्ति और साहस से प्रभावित होकर उसे राजपहलवान बना दिया।
    3. सिख बीबी की शारीरिक बनावट के बारे में सफ़िया के माध्यम से लेखिका कहती है कि उन सिख बीबी को देखकर सफ़िया हैरान रह गई थी कि वह उसकी माँ से कितनी ज्यादा मिलती थी। वही भारी भरकम शरीर जिसमें छोटी-छोटी चमकदार आँखें जो नेकी, मुहब्बत और रहमदिली की रोशनी से जगमगाया करती थी। चेहरा जैसे कोई खुली हुई किताब। वैसा ही सफ़ेद बारीक मलमल का दुपट्टा जैसा उसकी अम्मा मुहर्रम में ओढ़ा करती थी, वह ओढ़े थीं ।
X