CBSE Class 12 Physical Education Hindi 03

CBSE Class 12 शारीरिक शिक्षा
Sample Paper 03

Time : 3:00 Hours
max. m. : 70

सामान्य निर्देश-

  1. इस प्रश्न पत्र में 34 प्रश्न हैं।
  2. सभी प्रश्न अनिवार्य है?
  3. प्रश्न संख्या 1 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है, प्रत्येक प्रश्न का सही विकल्प उत्तर पुस्तिका में लिखे?
  4. प्रश्न संख्या 21 से 30 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है, इसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 80 से 90 शब्दों में दे।
  5. प्रश्न संख्या 31 से 34 तक प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है, इसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 से 200 शब्दों में दें।

खण्ड (अ)

सही विकल्प चुनें-

  1. SPD का शाब्दिक रूप क्या है?
    1. सेन्सरी प्रोसेसिंग डिसऑडर
    2. सेन्सरी पर्सनल डिसऑडर
    3. सेन्सरी प्रॉब्लम डिसआडर
    4. सेन्सरी परसोना डिसआडर
  2. वह योग्यता जो थकान का प्रतिरोध करती है, कहलाती है?
    1. सहनक्षमता
    2. अक्षमता
    3. गति
    4. शक्ति
  3. हेरलाइन फ्रेक्सर ________ के रूप में भी जाना जाता है?
    1. ट्रांसवर्स
    2. ग्रीनस्टिक
    3. स्ट्रैस
    4. ऑबलिक
  4. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व हमेशा देखता है?
    1. समाज की ओर
    2. अपनी ओर
    3. दूसरों की ओर
    4. दोस्तों की ओर
  5. यदि कुल टीमों की संख्या 29 हो तो बाई की संख्या ________ होगी।
    1. 2
    2. 4
    3. 1
    4. 3
    अथवा

    किसी अंकुचन में यदि माँसपेशियों की लम्बाई में परिवर्तन होता है तो वह ________ कहलाता है-

    1. आइसोमेट्रिक
    2. आइसोटोनिक
    3. आइसोकाइनेटिक
    4. फार्टलेक
  6. एक्टोमोर्फि में शब्द “एक्टो” किस लिए जाना जाता है?
    1. मोटा
    2. पतला
    3. गठिला
    4. गोल-मटोल
  7. निम्न में कौन-सा बृहत पोषक तत्त्व नहीं है?
    1. कार्बोहाइड्स
    2. प्रोटीन
    3. वसा
    4. विटामिन
    अथवा

    BMI की सामान्य सीमा है-

    1. 18 से 25
    2. 16 से 24
    3. 19 से 25
    4. 25 से 30
  8. सही उत्तर के साथ मिलान कीजिए-
    1. 600 मी. दौड़ (A) सामान्य गामक पुष्टि
    2. जिग-जैग दौड़ (B) रिकली एण्ड जोन्स परीक्षण
    3. हार्डवर्ड स्टेप टेस्ट (C) गामक क्षमता परीक्षण
    6 मिनट चाल टेस्ट (D) हृदय पेशीय क्षमता परीक्षण
    1. 1-D, 2-C, 3-B, 4-A
    2. 1-C, 2-A, 3-D, 4-B
    3. 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
    4. 1-D, 2-B, 3-A, 4-C
    अथवा

    सही उत्तर के साथ मिलान कीजिए?

    1. गामक क्षमता परीक्षण (A) चेयर स्टैंड परीक्षण
    2. रिकली एण्ड जोन्स परीक्षण (B) शारीरिक क्षमता की गणना
    3. सामान्य गामक क्षमता परीक्षण (C) खड़ी कूद
    4. हृदय पेशी क्षमता परीक्षण (D) 4 x 10 मी. शटल दौड़
    1. 1-C, 2-B, 3-A, 4-D
    2. 1-B, 2-A, 3-D, 4-C
    3. 1-D, 2-A, 3-C, 4-B
    4. 1-B, 2-A, 3-D, 4-C
  9. सही उत्तर के साथ मिलान कीजिए?
    1. खाद्य असहिष्णुता (A) वजन घटाने के लिए
    2. भोजन मिथक (B) उलटी
    3. डायटिंग (C) स्वास्थ्य भार
    4. BMI- 24 (D) भोजन के दौरान पानी व पीना
    1. 1-D, 2-A, 3-B, 4-C
    2. 1-B, 2-D, 3-A, 4-C
    3. 1-B, 2-A, 3-D, 4-C
    4. 1-D, 2-A, 3-C, 4-D
  10. निम्नलिखित खेल चोटों के कारण है, सिवाय-
    1. शरीर को ठीक स न गर्माना
    2. खेल सुविधाओं का अभाव
    3. थकान के दौरान अभ्यास
    4. खेल कौशल में प्रवीणता
  11. निम्नलिखित अस्थिभंग के उदाहरण है, सिवाय-
    1. रंगड़
    2. दबाव अस्थिभंग
    3. आब्लीक् फ्रेक्चर
    4. जटिल अस्थिभंग
    अथवा

    पीठ अर्थ का संबंध है-

    1. अग्नाशय से
    2. मेरुदण्ड से
    3. हृदय से
    4. श्वास नली से
  12. 13-19 वर्ष की अवस्था क्या कहलाती है?
    1. बाल्यावस्था
    2. प्रोढ़ावस्था
    3. किशोरावस्था
    4. शैरावस्था
  13. अडॅक्शन गति के दौरान हाथ शरीर से जाते हैं?
    1. दूर
    2. शरीर के पास
    3. आगे की ओर
    4. पीछे की ओर
  14. न्यूटन का पहला नियम ________ से जाना जाता है।
    1. जड़त्व का नियम
    2. त्वरण का नियम
    3. क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम
    4. गुरुत्वाकर्षण का नियम
  15. जीव की विश्राम व गति की स्थिति का अध्ययन कहलाता है-
    1. जीवरासायनिक
    2. शरीर रचना विज्ञान
    3. जीवयान्त्रिकी
    4. मनोविज्ञान
  16. किसी प्रतियोगिता में यदि प्रत्येक टीम, प्रत्येक टीम से खेलती है तो उसे कहते हैं?
    1. लीग इर्नामेण्ट
    2. नॉकऑउट टूर्नामेन्ट
    3. नॉकआउट-कम-लीग
    4. लीग-कम-लीग
  17. पीठ दर्द के लिए आसन का चुनाव करें?
    1. त्रिकोनासन
    2. पश्चिमोत्तानासन
    3. चक्रासन
    4. शलभासन
  18. ADHD का पूरा नाम ________ है।
    1. अटेंशन डेफिसिट हॉइपरएक्टिव डिसऑडर
    2. आटोमेटिक डेफिसिट हाइपएक्टिव डिसऑडर
    3. अटेन्शन डिफलेक्शन हाइपएक्टिव डिसऑडर
    4. अटेन्शन डेफिसिट हाइपएक्टिव डिजीज्
  19. पाँव की आर्च किस मुद्रा विकृति से संबंधित है?
    1. फ्लैट फुट (चपटा पाँव)
    2. लोर्डेसिस
    3. कॉयफोसिस
    4. स्कोग्लियोसिस
  20. जब मेरुदण्ड दाई या बांई ओर मुड़ी तो क्या कहलाती है-
    1. स्कोलिओसिस
    2. कॉयफोसिस
    3. लॉर्डोसिस
    4. फ्लैट फुट

खण्ड (ब)

  1. शलभासन और अर्धमत्सयेंद्र आसन की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए?
  2. व्यायाम अनुपालन को स्पष्ट कीजिए। (व्यायाम करने के किन्हीं दो कारणों को लिखिए)।
  3. लीग टूर्नामेंट के लाभ तथा हानियों का वर्णन कीजिए?
  4. किन्हीं दो बृहत पोषक पदार्थों का वर्णन कीजिए?
  5. विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिये किन्हीं तीन शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण करने की रणनीतियों की व्याख्या कीजिए?
    अथवा

    धनुषाकार टांगों के कारण तथा सुधारात्मक उपाय लिखिए?

  6. गामक पुष्टि परीक्षण से आप क्या समझते हैं? चपलता तथा टांगों की विस्फोटक शक्ति मापने के लिए गामक पुष्टि परीक्षण की प्रक्रिया को लिखिए।
    अथवा

    फार्टलेक प्रशिक्षण विधि क्या होती है?

  7. शक्ति के विकास की विधियों का विस्तार से उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए?
  8. कोमल उत्तक की चोटों को सूचीबद्ध कीजिए? मोच के प्रकारों का वर्णन कीजिए?
    अथवा

    व्यायाम के कोई छः लाभ लिखिए?

  9. माँसपेशी संस्थान पर व्यायाम के प्रभाव को लिखो?
  10. घर्षण क्या है? खेलों में विभिन्न प्रकार के घर्षण की व्याख्या कीजिए?

खण्ड (स)

  1. संतुलित आहार को परिभाषित कीजिए। वृहत पोषक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों को सूचीबद्ध करते हुए कार्बोहाइड्रेट के महत्त्व का संक्षिप्त में विवरण दीजिए।
  2. आसन को परिभाषित करते हुए यह बताइए कि आसन किस प्रकार जीवनशैली संबंधी रोगों से बचाव करते हैं।
  3. O.D.D. (ओ.डी.डी.) को परिभाषित करते हुए इसके कारण व लक्षणों का सविस्तार वर्णन कीजिए?
    अथवा

    भारत में खेलों में महिलाओं की भागीदारी को सुधारने के सुझाव दीजिए।

  4. चेयर सिट व रीच परीक्षण का सविस्तार वर्णन कीजिए?
    अथवा

    नॉक आउट के आधार पर 24 टीमों के लिए फिक्सचर तैयार कीजिए।

CBSE Class 12 शारीरिक शिक्षा
Sample Paper 03
[उत्तर]


खण्ड (अ)

  1. i.
  2. i.
  3. ii.
  4. ii.
  5. iv. अथवा ii.
  6. ii.
  7. iv. अथवा v.
  8. ii. अथवा ii.
  9. ii.
  10. iv.
  11. i. अथवा ii.
  12. iii.
  13. ii.
  14. i.
  15. iii.
  16. i.
  17. iv.
  18. i.
  19. i.
  20. i.

खण्ड (ब)

    • शलभासन विधिः
      1. पेट के बल लेट जाएं।
      2. अपने हथेलियों को जांघों के नीचे रखें ऐड़ियों को आसन में जोड़कर रखें।
      3. सांस लेते हुए अपने पैरों को यथासंभव ऊपर ले जाएं। ध्यान रखे इस अवस्था में ठोडी को जमीन पर टिकाकर रखें।
      4. इस अवस्था में कुछ समय रहें। सांस छोड़ते हुए पाँव नीचे लाएँ।
      5. इस तरह उसे 5 बार करें।
    • अर्धमत्सयेंद्रासन विधिः
      1. नीचे बैठकर दोनों पैरों को सीधा फैला दें।
      2. दाँए पैर को इस प्रकार मोडें कि ऐड़ी बाएं नितम्ब के पास आ जाए। बाएँ पैर को मोड़कर दाएं घुटने के बाहर की ओर खड़ा करें।
      3. बायें घुटने को छाती के पास रखें।
      4. दाई भुजा के ऊपरी भाग से घुटने को श्वास बाहर निकालते हुए दबाएँ और बाएँ पैर का पंजा पकड़ लें।
      5. बायाँ हाथ कमर के पीछे रखें तथा गर्दन को अधिक से अधिक धड़ को घुमाते हुए बाईं ओर मुड़े।
      6. श्वास को सामान्य बनाए रखें।
  1. व्यायाम वह शारीरिक क्रिया है जिसके द्वारा शारीरिक क्षमता को बनाए रखने व बढ़ाने में मदद मिलती है तथा संपूर्ण स्वास्थ्य व सुयोग्यता को पाया जाता है।
    हमारा अभिप्राय, व्यायाम के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को लंबे समय तक प्रारंभिक व्यायाम शुरुआत के बाद से लगातार बनाए रखने तक है।

    1. सभी अंगों की काम करने की क्षमता बढ़ाना:- व्यायाम कार्यक्रमों में भाग लेने, व्यक्ति शरीर के बारे में तथा उसकी कार्यप्रणाली को समझने में दक्ष हो जाता है व्यायाम करने से व्यक्ति सभी अंगों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है या बनाए रखता है जिससे उसे एक खुशहाल जिंदगी जीने में मदद मिलती है।
    2. दैनिक कार्यों में दक्षता:- व्यायाम करने से न केवल क्षमता बढ़ती है या बनी रहती है अपितु इससे आत्मविश्वास, अनुभूति, आरामदायक, निराशा कम होना, इत्यादि गुणों का विकास होता है, जिसमें व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों को करने में दक्ष हो जाता है।
    • लाभ:-
      • टूर्नामेंट का आकर्षण अंत तक बना रहता है।
      • सभी टीमों को खेलने का पूरा मौका मिलता है।
      • टीम को हारने के बाद भी टूर्नामेंट से बाहर नहीं किया जाता है।
    • हानियाँ:-
      • धन की आवश्यकता अधिक होती है।
      • परिणाम देर से आते हैं।
      • समय अधिक लगता है।
      • खेल अधिकारी तथा खेल मैदान की आवश्यकता अधिक होती है।
    • कार्बोहाइड्रेट:-
      1. पेशी संकुचन के लिए प्रमुख ईंधन के रूप में कार्य।
      2. यह हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
      3. यह शरीर के वजन और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है।
      4. हमारे शरीर में विभिन्न पाचन कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
    • वसाः-
      1. यह शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है।
      2. यह शरीर को अत्याधिक ठंड और गर्म जलवायु से बचाता है।
      3. शरीर के तापमान के नियामन में मदद करता है।
      4. यह शरीर के आंतरिक अंगों की रक्षा करने में भी मदद करता है।
    1. रुचिः- जब शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण किया जाये तो दिव्यांग की रुचि का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि वह इन शारीरिक क्रियाओं में पूर्ण रूप से भाग ले सके।
    2. क्षमता:- जब भी शारीरिक क्रियाओं का निर्धारण किया जाए तो दिव्यांग की शारीरिक तथा मानसिक योग्यता को समझ लेना चाहिए ताकि उसकी क्षमता के अनुरूप शारीरिक क्रियाओं का चयन किया जा सके।
    3. रूपांतरित उपकरण:- उपकरणों का रूपांतरण हमेशा दिव्यांगों की अक्षमता के स्तर के अनुरूप हो ताकि वह शारीरिक क्रियाओं में भाग ले सकें।
      अथवा
    • कारण:
      1. घुटनों के लेटरल लिगामेंट का मिडियल लिगामेंट की अपेक्षा ज्यादा बढ़ जाना।
      2. हड्डियों का तथा मांसपेशियों का कमजोर हो जाना।
      3. लंबे समय तथा सुखासन में बैठना।
      4. गलत तरीके से चलना।
      5. मोटापा।
      6. बालक को समय से पहले खड़ा करना अथवा चलाना।
    • सुधारात्मक उपाय:
      1. वाकिंग कैलिपर्स का इस्तेमाल करना।
      2. घुटनों की मालिश करना।
      3. घुटनों के आसपास की मांसपेशियों की शक्ति को बढ़ाने वाले व्यायाम करना जैसे- लैग एक्सटेन्सन करना।
      4. योग पट्टियों की सहायता से दोनों पैरों को सीधा करके बांधे और फिर गौ-आसन की स्थिति को बनाना।
      5. पिलेटिस व्यायाम करना जैसे कि रोल अप बेलरिना आर्म।
      6. गरुड़ आसन करना।
      7. अर्धमत्सयेंद्र आसन करना।
  2. पुष्टि से ताप्तर्य किसी एथलीट या खिलाड़ी के द्वारा उसके विशिष्ठ खेल में प्रभावशाली रूप से प्रदर्शन करने की योग्यता या क्षमता है।
    टांगों की विस्फोटक शक्ति को मापनाः- प्रक्रिया-मैदान पर एक टेक ऑफ लाइन लगा दी जाती है। विद्यार्थी अपने दोनों पैरों में मध्य कुछ इंच का अंतर रखते हुए टेक ऑफ लाइन के ठीक पीछे खड़ा हो जाता है, फिर वह अपने दोनों हाथों को आगे-पीछे झुलाता है तथा अपने घुटनों को मोड़कर लॉग जम्प पिट में जम्प लगाता है, उसे तीन ट्रांसल्स दी जाती है। टेक ऑफ लाइन से एड़ियों या शरीर का कोई भाग जो टेक ऑफ लाइन के सबसे पास वाली दूरी हो, उसे माप लिया जाता है। सभी जम्प्स मापी जाती है सभी जम्पस फीट व इंच में मापी जाती है।
    चपलता को मापने के लिए:-
    दो सामांतर रेखाओं के बीच यह दौड़ लगाई जाती है। खिलाड़ी प्रारंभिक रेखा से भागकर दूसरी रेखा पर रखे लकड़ी के गुटके को उठाकर वापिस ले आता है, फिर भागकर लकड़ी के दूसरे गुटके को उठाकर वापस प्रारंभिक रेखा पर आ जाता है। इस परीक्षण के लिए दो ट्राइल दिए जाते हैं।

    अथवा

    फार्टलेक प्रशिक्षण:- यह सहन दक्षता को बढ़ाने की विधि है स्वीडन के गोस्ट होल्मर ने 1930 में इसे ‘स्वीडिश प्ले’ से भी जाना जाता है इस विधि में धावक अपने अनुसार अपनी गति को आस-पास के वातावरण के अनुकूल परिवर्तित कर सकता है। इस विधि के द्वारा शक्ति और सहन क्षमता का विकास होता है खिलाड़ी अपनी गति अपने अनुसार परवर्तित करता है अतः यह विधि स्वतः अनुशासित कहलाती है। इसमें हृदय गति 140-180 प्रति मिनट पहुँच जाती है। फार्टलेक प्रशिक्षण में दौड़ गति कम ज्यादा होती रहती है।

  3. आइसोटोनिक व्यायाम ऐसे व्यायाम हैं जिसमें गतिविधियां प्रत्यक्ष रूप से देखी जाती हैं। उदाहरण पुश अप, पुल अप आदि।
    आइसोमैट्रिक व्यायाम वह होते हैं जिनमें क्रियाकलापों को करने से मांसपेशियों की लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता है, आइसोमैट्रिक व्यायाम कहलाते है- उदाहरण- दीवार को धक्का लगाना।
    आइसोकाइनेटिक व्यायाम- आइसोकाइनेटिक व्यायाम विशेष प्रकार से निर्मित मशीनों द्वारा किए जाते हैं। उदाहरण ट्रैडमिल पर दौड़ना, मल्टी जिम मशीनों पर व्यायाम।
  4. कोमल उतक की चोटें:- मोच, खिंचाव, नील पड़ना, कटना, फटना, छिलना,
    मोचः- मोच कोमल ऊतक की वह चोट है, जो लिगामेंट में घटित होती है।
    प्रथम दर्जा मोच:- लिगामेंट में अत्यधिक खिंचाव के कारण जोड़ में दर्द होता है तथा इस अवस्था में राहत मिलने में लगभग 1 सप्ताह से 2 सप्ताह तक का समय लग जाता है।
    द्वितीय दर्जा मोचः- आंशिक रूप से लिगामेंट का टूटना, जोड़ में सूजन, दर्द, इस अवस्था से राहत मिलने में 1 लगभग 1 सप्ताह से 2 सप्ताह तक का समय लग जाता है।
    तृतीय दर्जा मोचः- पूर्ण रूप से लिगामेंट का टूटना, सूजना, अत्याधिक दर्द इस अवस्था से राहत मिलने में। महीना या उससे भी अधिक समय लग जाता है।

    अथवा
    1. बड़ी बीमारियों से बचने के लिए जैसे हृदय रोग, मधुमेह आदि।
    2. व्यक्तित्त्व को निखारने हेतु।
    3. विभिन्न शारीरिक समस्याओं की कार्य क्षमता बढ़ाने हेतु।
    4. शारीरिक पुष्टि तथा स्वास्थ्य संबंधी पुष्टि को बढ़ाने हेतु।
    5. समूह व्यवहार, ध्यान तथा एकाग्रता बढ़ाने हेतु।
    6. अच्छी आदतों, अनुशासन, कड़ी मेहनत जैसे गुणों के विकास हेतु।
    1. माँसपेशीय, अतिवृद्धि लगातार व्यायाम करने से पेशीय आकार में वृद्धि होती है।
    2. कोशिका नलिकाओं का निर्माण:- प्रशिक्षण के कारण पेशियों में कोशिका नलिकाओं की संख्या में वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण पेशियें का रंग गहरा लाल हो जाता है।
    3. अतिरिक्त वसा का नियंत्रणः- नियमित व्यायाम करने अतिरिक्त वसा पर नियंत्रण होता है। व्यायाम कैलोरीज को कम करने में मदद करते है जो वसा के रूप में जमा हो जाती है।
    4. थकान में देरी:- नियमित व्यायाम से थकान में देरी आती है। यह थकान कार्बन डाइआक्साइड, लैक्टिक एसिड और फास्फोट एसिड के कारण होता है।
    5. नियमित व्यायाम करने से आसन तथा आसन संबंधी विकृतियों में सुधार होता है।
  5. दो सतहों के बीच संपर्क से उप्तन्न गति के प्रतिरोध, घर्षण कहलाता है। घर्षण दो प्रकार के होते है-
    1. स्थिर घर्षण:- जब एक वस्तु, दूसरी वस्तु की सतह पर बढ़ना शुरु करती है लेकिन वास्ताविक गति अभी प्रारंभ न हुई हो, इसे स्थिर घर्षण बल कहा जाता है। उदाहरण- दौड़ने की प्रारंभिक स्थिति।
    2. गतिशील घर्षण:- जब एक वस्तु दूसरी वस्तु की सतह पर वास्ताविक रूप में चलना शुरू कर देती है तो उसे गतिशील घर्षण कहते हैं। उदारहण- गेंद लुढ़कर रुक जाने तक जो घर्षण बल लगता है, वह गतिशील घर्षण बल है। गतिशील घर्षण भी दो प्रकार का है-
      (क). स्लाइडिंग घर्षण:- जब एक वस्तु वास्तव में दूसरी वस्तु की सतह पर सरकने लगती है तो उसे स्लाइडिंग घर्षण कहा जाता है।
      (ख). रोलिंग घर्षण:- जब एक वस्तु दूसरी वस्तु की सतह पर लुढ़कने लगती है तो उसे रोलिंग घर्षण कहते हैं।

खण्ड (स)

  1. संतुलित आहार वह होता है, जिस भोजन में विभिन्न पोषक तत्व सही व उचित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
    वृहत् पोषक तत्व:- 1. कार्बोहाइड्रेट, 2. वसा, 3. प्रोटीन, 4. पानी
    पोषक तत्व:- 1. विटामिन, 2. मिनरल
    कार्बोहाइड्रेटः- हमारे भोजन का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग कार्बोहाइड्रेट है। सभी शारीरिक क्रियाओं के लिए ऊर्जा इसी से प्राप्त होती है। अतिरिक्त मात्रा में ग्रहण किया, कार्बोहाइड्रेट शरीर के द्वारा वसा व ग्लाइकोजन के रूप में परिवर्तित करके संग्रहित कर लिया जाता है। जो कि समय पड़ने पर शरीर के द्वारा उपयोग कर लिया जाता है।
  2. पतंजलि के अनुसार “स्थिरम् सुखम् आसनम्।” सुखपूर्वक बैठने की स्थिति को आसन कहते है।
    1. शरीर में दृढ़ता लाता है व लचीला बनता है।
    2. नाड़ियाँ, ग्रन्थियाँ, माँसपेशियों (24 घंटे काम करने वाले अंगों) पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
    3. शरीर का सर्वांगीण विकास होता है।
    4. सहनशीलता, आत्मविश्वास का विकास होता है।
    5. नकारात्मक विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचार और एकाग्रता बढ़ने लगती है।
    6. शरीर चुस्त व रोग मुक्त रहता है।
    7. चिंता से राहत।
    8. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।
  3. यह व्यवहार विकारों का एक समूह है जिसे विघटनकारी व्यवहार विकार से भी जाना जाता है। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति अपने चारों ओर की चीजों को बाधित करता है।
    ODD के लक्षण
    व्यवहार संज्ञानात्मक मनौवैज्ञानिक
    तर्क करना, लड़ाई करना, दूसरों को आरोपित करना हताश होना दोस्त बनाने के मुश्किल होना
    बार-बार आज्ञा का उल्लंघन कार्य ध्यान भटकना झुंझलाहट की भावना
    स्वेच्छा से दोस्ती तोड़ना, बिना सोचे बोलना आत्मसम्मान की कमी

    ODD के कारण:-
    -आनुवांशिक
    -जैविक कारण- मस्तिष्क सम्बन्धी चोट
    वातावरण सम्बन्धित कारण- पारिवारिक जीवन में अशांति

    अथवा
    1. महिलाओं को प्रेरित करना।
    2. परिवार तथा समाज का सहयोग।
    3. महिलाओं के लिए शिक्षित, सेमीनार व कार्यशाला का आयोजन।
    4. अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करना।
    5. नई वैज्ञानिक तकनीकी सामान व साधन का प्रबंधन करना।
    6. सामाजिक बाधाओं को ग्रामीण स्तर पर दूर करना।
    7. वित्तिय सहायता प्रदान करना।
    8. रोजगार के अवसर देना।
    9. सरकारी नितियों का निर्माण करना।
    10. महिला कोचों की नियुक्ति करना।
  4. चेयर सीट व रीच परीक्षण वारिष्ठ नागरिकों के शरीर के निचले भाग की लचक का मूल्यांकन करना जो सही मुद्रा या आसन सामान्य चाल तथा विभिन्न गति शीलता-संबंधी कार्यो के लिए: जैसे- बाथ टब अथवा कार में बैठने तथा बाहर निकलते हेतु अनिवार्य होता है।
    आवश्यक सामग्री:- पैमाना (scale), 44 cm कुर्सी (सीधी बैक वाली)
    प्रक्रिया (Procedure):- कुर्सी को दीवार से सटा कर रखते है ताकि प्रतिभागी किनारे पर आराम से बैठ सके। एक पैर फर्श पर समतल तथा दूसरे पैर का घुटना सीधा आगे की चेयर सिट एवं रीच परीक्षण ओर रखता है। पैर तथा टखना 90° मुड़ा हुआ होना चाहिए। दोनों हाथों की बीच वाली अंगुली के ऊपरी सिरों को बराबर रखते हुए एक हाथ को दूसरे हाथ में ऊपर रखें। प्रतिभागी सांसे लेते हुए दोनों हाथों को सामान्य स्थिति में तथा साँस छोडते हुए कूल्हों पर शरीर को मोड़ते हुए आगे पैर के पंजे की ओर हाथ ले जाने हेतु कहेगे! पीठ सीधी तथा सिर ऊपर! किसी प्रकार के झटके अथवा उछाल से बचे तथा कभी भी आवश्यकता से अधिक खिंचाव न आए। घुटने को सीधा रखे तथा रीच (Reach) के समय 2 सेंकड के लिए रूके। पंजे तथा अँगुलियों के बीच की दूरी को मापे! यदि पैर के पंजें को छू लेते हैं तो स्कोर शून्य, यदि नहीं छूते है तो ऋणात्मक स्कोर (पैर के पंजे तथा अँगुलियों के सिरे को बीच की दूरी को मापा जाता है) परन्तु यदि प्रतिभागी के पंजे तथा अँगुलियाँ एक दूसरे को ढक लेते है तो धनात्मक स्कोर होता था तथा जितनी भी दूरी हो उसे माप लिया जाता है।

    अथवा

    कुल मैच = टीमों की संख्या – 1
    24 – 1 = 23
    कुल चक्र (Round) = 2×2×2×2×2, संख्या दो की पुनरावृत्ति 5 चक्र खेले जाएँगे।
    ऊपरी अर्ध (Upper half) में टीमों की संख्या = कुल टीमों की संख्या/2
    242=12242=12
    निचले अर्ध (Lower half) में टीमों की संख्या = कुल टीमों की संख्या/2
    242=12242=12
    क्योंकि टीमें 16 से ज्यादा है, इसलिए टीमों को क्वार्टर में भी बाँटा जाएगा।

    यदि शेषफल शून्य हो तो
    पहले क्वार्टर में टीमों की संख्या = भागफल (Q) = 6
    दूसरे क्वार्टर में टीमों की संख्या = भागफल (Q) = 6
    दूसरे क्वार्टर में टीमों की संख्या = भागफल (Q) = 6
    चौथे क्वार्टर में टीमों की संख्या = भागफल (Q) = 6
    कुल बाई = 2 की अलगी पॉवर – कुल टीमों की संख्या = 32 – 24 = 08
    ऊपरी अर्ध (Upper half) में बाई की संख्या =082=04=082=04
    निचला अर्ध (Lower half) में बाई की संख्या =082=04=082=04

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