CBSE Class 12 Physical Education Hindi 04

CBSE Class 12 शारीरिक शिक्षा
Sample Paper 04

Time : 3:00 Hours
max. m. : 70

सामान्य निर्देश-

  1. इस प्रश्न पत्र में 34 प्रश्न हैं।
  2. सभी प्रश्न अनिवार्य है?
  3. प्रश्न संख्या 1 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है, प्रत्येक प्रश्न का सही विकल्प उत्तर पुस्तिका में लिखे?
  4. प्रश्न संख्या 21 से 30 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है, इसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 80 से 90 शब्दों में दे।
  5. प्रश्न संख्या 31 से 34 तक प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है, इसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 से 200 शब्दों में दें।

खण्ड (अ)

सही विकल्प चुनें-

  1. अक्षमता को विकसित करने में सहायक है-
    1. आनुवांशिकता
    2. सन्तुलित आहार
    3. चोटें
    4. ‘i’ तथा ‘ii’ दोनों
  2. लीग टूर्नामेंट विधि में निम्नलिखित में से किस विधि का प्रयोग फिक्सचर बनाने का प्रक्रिया में नहीं होता?
    1. साइकिलक विधि
    2. स्टेयरकेस सीढ़ीनुमा, विधि
    3. नॉक आऊट विधि
    4. तालिका विधि
    अथवा

    नॉक आउट टूर्नामेन्टस में यदि टीमों की संख्या 19 है तो मैचों की संख्या होगी?

    1. 171
    2. 18
    3. 19
    4. 20
  3. वसा प्राप्ति के स्रोत-
    1. मीट
    2. मक्कखन
    3. दालें
    4. सब्जियाँ
  4. क्षुधा अभाव (एनोरेक्सिया नर्वोसा) एक विकार है?
    1. खाना संबंधी
    2. मानसिक
    3. शारीरिक
    4. बौद्धिक
  5. प्रथम रजोदर्शन मासिक रक्त स्राव का है-
    1. अन्तिम
    2. नियमित
    3. पहला
    4. अनियमित
  6. गति में महत्त्वपूर्ण कारक कौन-सा है?
    1. पैरों की शक्ति
    2. हाथों की शक्ति
    3. पैरों की लंबाई
    4. माँसपेशियों के प्रकार
  7. एरोबिक गतिविधियाँ के लिए कौन-सा पदार्थ जिम्मेदार हैं?
    1. कॉर्बन डाई-ऑक्साइड
    2. हाइड्रोजन
    3. ऑक्सीजन
    4. हिलियम
  8. चीरा (Incision) किस प्रकार की चोटें है?
    1. कठोर उत्तक
    2. मुलायम या कोमल उत्तक
    3. जोड़ों उत्तक
    4. अस्थि उत्तक
  9. खेल टूर्नामेन्टस में सबसे पहला कदम क्या है?
    1. योजना
    2. समितियाँ
    3. समन्वय
    4. प्रबंध
  10. फार्टलेक प्रशिक्षण विधि शारीरिक पुष्टि के किस अवयव को विकसित करने में सहायक है?
    1. शक्ति
    2. सहनशीलता
    3. गति
    4. लचक
  11. विटामिन ‘A’ एक ऐसा विटामिन है जो-
    1. पानी में घुलनशील
    2. वसा में घुलनशील
    3. ‘i’ तथा ‘ii’ दोनों में
    4. अघुलनशील
    अथवा

    बी.एम.आई का प्रयोग-

    1. शरीर स्वास्थ्य भार
    2. शरीर शक्ति
    3. शरीर वसा अवयव
    4. शरीर सहनशीलता
  12. अर्ध मत्स्येन्द्रासन तथा पश्चिमोतासान का उपयोग किस जीवन शैली रोग को दूर करने में किया जाता है?
    1. अस्थमा
    2. मधुमेह
    3. कैंसर
    4. क्षुधा अभाव
  13. उस स्थिति को क्या कहते जब व्यक्ति के काम करने की क्षमता कम होने लगती है?
    1. बाल्यावस्था
    2. किशोरावस्था
    3. प्रौढ़ावस्था
    4. वृद्धावस्था
  14. 50 मीटर स्टैडिंग स्टार्ट दौड़ का क्या उद्देश्य है?
    1. शरीर का तालमेल
    2. सहनशीलता
    3. गति तथा त्वरण
    4. लचक व चपलता
    अथवा

    हार्डवर्ड स्टेप परीक्षण का उपयोग किस का मापन करने के लिए किया जाता है?

    1. हृदय वाहिका
    2. स्वस्थ्यता पुष्टि
    3. निचले भाग की शक्ति
    4. समन्वय तथा चपलता
  15. बी.एम.आई. का सूत्र
    1. ऊँचाई (भार)2
    2. भार × 100/(ऊँचाई)2
    3. ऊँचाई × भार2
    4. ऊँचाई × 100/(भार)
  16. हाथ को बगल से (दायें या बायें) गति कि गति का उदाहरण है?
    1. मोड़ना (Flexion)
    2. फैलाव (Extension)
    3. अपावर्तन (Adbuction)
    4. अभिवर्तक
  17. अंतर्भूत प्रेरणा में-
    1. पुरस्कार
    2. दण्ड
    3. प्रशंसा
    4. ‘i’ तथा ‘ii’ दोनों
  18. ‘सीट’ तथा ‘रीच’ परीक्षण द्वारा क्या मापा जाता है?
    1. शक्ति
    2. सहनशीलता
    3. लचक
    4. बी. एम. आई.
  19. खेल प्रशिक्षण का उद्देश्य-
    1. शारीरिक पुष्टि में सुधार
    2. शरीर भार में सुधार
    3. शरीर आकार में सुधार
    4. समाज में सर्वोत्तम स्थान प्राप्त करना
  20. न्यूटन का दूसरा नियम कौन-सा है?
    1. समन्वय का नियम
    2. जड़त्व का नियम
    3. गुरुत्व का नियम
    4. त्वरण का नियम

खण्ड (ब)

  1. प्राथमिक चिकित्सा की परिभाषा लिखिए? जोड़ों की चोटों को प्रबंध का वर्णन कीजिए?
  2. विशेष योग्यता वाले बच्चों के लिए शारीरिक क्रियाओं के लाभ बताइये?
    अथवा

    SPD (एस.पी.डी.) क्या है? इसके लक्षण व कारकों को लिखिए?

  3. खेलों के क्षेत्र में घर्षण के लाभदायक तथा हानिकारक तत्त्वों को प्रस्तुत कीजिए?
  4. अस्थमा के बचाव के लिए कोई दो आसनों की विधि बताइये?
  5. भोजन के सूक्ष्म पोषण तत्त्व-खनिज लवणों का वर्णन हमारे शरीर के लिए आवश्यक है?
    अथवा

    गैर पोषक तत्व क्या है? वर्णन कीजिए।

  6. लोच/लचक क्या है? लचक को विकसित करने वाली विधियों को लिखिए।
  7. प्रतियोगिता से पहले विभिन्न समितियों के कार्य को बताइये?
  8. महिलाओं में असामान्य मासिक धर्म के कारणों को लिखिए?
  9. आंतरिक तथा बाहरी अभिप्रेरणा में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
    अथवा

    अभ्यास की अनुवर्ती (अनुपालन) को बढ़ाने की रणनीतियों का वर्णन कीजिए।

  10. परिधि प्रशिक्षण किसे कहते है। परिधि प्रशिक्षण के लाभों को बताइये।

खण्ड (स)

  1. चोटों को वर्गीकरण कीजिए “प्राइस” की प्रक्रिया का कोमल उत्तकों के उपचार के रूप में वर्णन कीजिए?
  2. हृदय वाहिनी संस्थान पर व्यायाम से पड़ने वाली तत्कालीन प्रभावों को विस्तार से बताइये?
    अथवा

    व्यक्तित्व के बिग 5 लक्षण सिंद्धात की विस्तार से व्याख्या कीजिए?

  3. रिकली एंड जॉन्स वरिष्ठ नागरिक क्षमता परीक्षण लिखिए? कोई पाँच।
    अथवा

    भारत में खेलों में महिलाओं की भागीदारी के लिए सुझाव लिखिए।

  4. नॉक आउट के आधार पर 23 टीमों का फिक्स्चर तैयार की किया।

CBSE Class 12 शारीरिक शिक्षा
Sample Paper 04 (2019-20)
[उत्तर]


खण्ड (अ)

  1. iv.
  2. iii. अथवा ii.
  3. ii.
  4. ii.
  5. iii.
  6. iv.
  7. iii.
  8. ii.
  9. i.
  10. ii.
  11. ii. अथवा i.
  12. ii.
  13. iv.
  14. iii. अथवा i.
  15. iii.
  16. iii.
  17. iv.
  18. iii.
  19. i.
  20. iv.

खण्ड (ब)

  1. प्राथमिक चिकित्सा “एक ऐसी चिकित्सा, जिसमें आपातकालीन व दुर्घटना के समय डॉक्टर के पहुँचने से पहले घायल व्यक्ति को अस्थाई तौर पर दर्द से आराम देने तथा चोटों की स्थिति को कम करना या खून को रोकने की कोशिश करना”।
    1. शारीरिक सुधारः- एकाग्रता में सुधार, लचक में सुधार, शाक्ति में सुधार सहनशीलता में सुधार, हृदय सम्बन्धी सुधार, मोटापे से पीड़ित होने की सम्भावना कम हो जाती है, हड्डियों मजबूत तथा मोटी हो जाती है अच्छी शारीरिक पुष्टि अच्छी हो जाती है जोड़ों की सूजन कम होती है, तथा तंत्रिका तंत्र की कार्य क्षमता में सुधार आता है।
    2. मानसिक सुधारः- मनोदशा में सुधार, सुयोग्यता में सुधार अवसाद तथा चिंता के स्तर में कमी आती है।
    3. आत्म सम्मानः- शारीरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांगों का आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान की भावना में बढ़ोतरी होती है।
    4. स्वास्थ्यः- शरिरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांगों के स्वास्थ्य के स्तर में बढ़ोतरी होती है उसमें विकार उत्पन्न होने की सम्भावना कम हो जाती है।
    5. व्यक्तित्व:- शारिरिक क्रियाओं में भाग लेने से दिव्यांग के व्यक्तित्व के सभी पक्षों में निखार आता है।
    6. समाजिक लाभ:- नये अनुभव प्राप्त होना, नये दोस्त बनते है, आजादी का अनुभव होता है, दोषारोपण से बचना आदि।
    7. कार्य क्षमता:- शरिरिक क्रियाओं में भाग लेने से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ जाती है।
    अथवा

    SPD- Sensong processing Disorder (संवेदी प्रसंस्करण विकार) इस विकार में तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता में आयी कमी के कारण तंत्रिका तंत्र इन्द्रियों के माध्यम से प्राप्त हुई सूचना को प्राप्त करने में या तो असमर्थ होता है अथवा इन सूचनाओं को प्राप्त करने में मुश्किल आती है।

    1. SPD के लक्षण-
    2. आनुवांशिक:- कुछ एसे तत्व है जो अंनुवशिक रूप से माता पिता से बालक को मिल सकते है जैसे कि ध्वनि तथा प्रकाश के प्रति अत्याधिक संवेदनशील होना। ये तत्व बालक को (SPD) एस. पी. डी. की ओर अग्रसर कर सकते है।
    3. असाधारण मस्तिष्कः- यदि मस्तिष्क की बनावट उचित न हो तो भी व्यक्ति (SPD) एस. पी. डी. की ओर अग्रसर हो जाता है।
    4. तंत्रिका तंत्र सम्बन्धी विकारः- यदि तंत्रिका तंत्र सुचारू रूप से कार्य न कर रहा हो तो भी व्यक्ति (SPD) एस. पी. डी. की ओर अग्रसर हो जाता है।
    5. चोट:- गर्दन के ऊपरी भाग तथा ब्रेनस्टेम में लगे हुए आघात के कारण भी (SPD) एस. पी. डी. होने की सम्भावना अधिक हो जाती है।
    6. भोजन के तत्वों से एलर्जी:- भोज्य पदार्थो से होने वाली एलर्जी भी (S.P.D) एस. पी. डी. की ओर अग्रकर कर सकती है।
    7. गर्भ के समय मादक पदार्थी का उपयोगः- गर्भ के दौरान यदि माता मादक पदार्थी का सेवन करती है तो होने वाले बालक को (SPD) एस. पी. डी. होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
    8. वातावरणः- यदि वातावरण शद्ध न हो उसमें वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण बढ़े हुए हो तो बालक को (S.P.D) एस. पी. डी. की बीमारी हो सकती है।
    • घर्षण के लाभ:-
      1. वस्तु के स्थिति को बनाए रखना:- घर्षण किसी भी वस्तु की स्थिति तथा उसका आकार को स्थिर रखती है।
      2. गति में सहायता करना:- घर्षण के कारण हम आराम से चल व दौंड़ पाते है। धावक गति में तेजी लाने के लिए घर्षण को बढ़ाता है जैसे- स्पाइक्स (Spikes) का प्रयोग धावक द्वारा करना।
      3. पकड़ को मजबूत बनाना:- घर्षण के कारण खिलाड़ी अपने हाथों से वस्तु को बहुत अच्छी तरह से पकड़ लेता है। बैडमिन्टन खिलाड़ी राकेट में पकड़ को मजबूत करने के लिए घर्षण को बढ़ाते है।
      4. ताप को बढ़ाना:- घर्षण के कारण अतिरिक्ति ताप गति को बढ़ाने का काम करता हैं।
    • घर्षण के हानि:-
      1. वस्तु में टूटे तथा फूट होना:- घर्षण के कारण वस्तु में हमेश टूटे तथा फूट होती रहती है, इस से बचाने के लिए हमें वस्तुओं तेल या चिकनाई आदि का प्रयोग करना चाहिए।
      2. ऊर्जा का नुकसान:- घर्षण हमारे कामों में बहुत सारी ऊर्जा को खत्म कर देता है।
      3. गति को कम करना:- रोलर स्केटिंग जैसे खेल में घर्षण क्रिया की गति को कम कर देते है। इस के लिए सतह को चिकना बनाया जाता है।
      4. गति को मुश्किल बनाना:- कठिन व अधिक घर्षण भी क्रियाओं में गतिविधि को मुश्किल कर देता है।
  2. गोमुखासनः गोमुखासन यह योग करते समय शरीर का आकार गाय के मुख के समान होने के कारण इसे गोमुखासन कहा जाता है अंग्रेजी में इसें (The cow face pose) गोमुखासन कहा जाता है।
    पूर्व स्थिति:- सुखासन या दण्डासन में बैठ जाए।
    विधिः- सुखासन या दण्डासन में बैठ जायें।
    • बाए पैर की एडी को दाहिने नितम्ब के पास रखिए। दाहिने पैर को बाई जाँघ के ऊपर से करते हुए इस प्रकार स्थिर करे की घुटने एक दूसरे के ऊपर रहने चाहिए।
    • बाए हाथ को पीठ के पीछे मोड़कर हथेलियों को ऊपर की ओर ले जाए।
    • दाहिने हाथ को दाहिने कंधे पर सीधा उठा ले और पीछे की ओर घुमाते हुए कोहनी से मोड़कर हाथों को परस्पर बांध ले। अब दोनों हाथों को धीरे से अपनी दिशा में खींचे।
    • दृष्टि सामने की ओर रखें। पैर बदलकर भी करें।
    लाभ:- अस्थमा के बचाव के लिये उपयोगी, वजन को कम करता है। शरीर को सुडोल, लचीला और आकर्षक बनाता है।
    पर्वतासन:- इस आसन को करते समय मनुष्य की आकृति एक पर्वत के समान हो जाती है जिसके कारण इसे पर्वतासन कहते है यह आसन करने में बहुत ही सरल होता है।
    पूर्व स्थितिः- पदमासन में बैठ जाए।
    विधिः- जमीन पर दरी या आसन पर पद्मासन में बैठे।
    • अपने हाथों की उगलियों को आपस में फंसा लें। लम्बी श्वास लेते हुए अपने हाथों को ऊपर की तरह इस तरह से ले जाएं कि आपके हाथ सिर के ऊपर हो और हाथों की हथेलियां बाहर की ओर खुली रहें।
  3. खनिज पदार्थ जो शरीर के लिए जरूरी हैं निम्न हैं:-
    आयरन:- यह खनिज रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी है।
    कैल्शियम:- यह हमारी हड्डियों और दांतों के निर्माण में सहायता करता है।
    फास्फोरस:- यह हमारे दांतों को मजबूत बनाता है तथा हड्डियों को भी मजबूत करता है।
    सोडियम:- यह हमारे तंत्रिका तंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।
    आयोडीन:- आयोडीन बहुत जरूरी है इसकी कमी से ग्वाइटर रोग हो सकता है।
    फ्लोराइड:- यह हमारे नाखूनों और दांतों के निर्माण और मजबूत बनाने में सहायक है।
    इस तरह यह विटामिन और खनिज हमारे शरीर के वृद्धि विकास में सहायक हैं और इनकी कमी में कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती है।

    अथवा

    आहार के ऐसे तत्त्व जो शरीर को ऊर्जा या कैलोरी प्रदान नहीं करते, गैर पोषक तत्व कहलाते है। आहर में गैर पोषक तत्वों का प्रयोग भोजन को स्वाष्टिक, आकर्षक बनाने के लिए किया जाता है। बहुत से गैर पोषक तत्व शरीर के लिए लाभदायक है जो मधुमेह कैंसर जैसी बीमारियों को बढ़ाने वाले कीटाणुओं को बढ़ने से रोकथाम करते है।
    आहार के गैर-पोषक तत्व-

    1. रेशा फोक या फाइबर (Roughage or fibre)
    2. जल/पानी Water
    3. स्वाद यौगिक – Flavour compound
    4. रंग यौगिक – Colour compounds
    5. वनस्पति यौगिक
  4. खेल-कूद में लोच/ लचक को बनाए रखने के लिए खिंचाव वाले व्यायाम करने चाहिए। निम्न विधियों के द्वारा लोच को विकसित किया जा सकता है।
    1. खिंचाव और रोकने की विधि- हम अपने जोड़ो को अधिकतम सीमा तक खींचते है तथा पहले की स्थिति में आने से पूर्व कुछ सेंकेड वहीं पर रूकते है। जोड़ो के खिचांव को रोकने की स्थिति 3 से 8 सेकेंड की होनी चाहिए। इस विधि का प्रयोग निष्क्रीय लचक (Passive flexibility) में सुधार के लिए भी किया जाता है।
    2. बैलिस्टिक विधि- इस विधि में खिंचाव वाले व्यायाम घुमाकर (swing) किए जाते है इसलिए इन्हें बैलिस्टिक विधि कहा जाता है। इन व्यायामों को करने से पहले शरीर को गर्माना आवश्यक होता है। इन व्यायामों में स्नायुओं में अत्याधिक खिचाव होने के कारण चोट लगने की सम्भावना रहती है। इन व्यायामों को लय में किया जाता है।
    3. पोस्ट आइसोमैट्रिक विधि- यह विधि प्रोपीओसेप्टिव नाडी-पेशीय सरलीकरण के सिंद्धात पर आधारित है अर्थात यदि किसी स्नायु का अधिकतम सकुंचन कुछ सेकंड के लिए किया जाता है तथा वह उसी स्थिति में 6 से 7 सेकंड तक उस खिचांव का प्रतिरोध सहता है। उसे पोस्ट आइसोमैट्रिक विधि कहते है किसी स्नायु समूह को 8 से 10 सेकंड की अवधि तक खिंचाव देना चाहिए तथा इसे 4 से 8 बार दोहराना चाहिए।
  5. समितियाँ व्यक्तियों का समूह जो कि किसी टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए एक ही प्रकार का काम करते है समितियों के कार्यों का वर्णन प्रतियोगिताओं पूर्व
    1. आयोजन/प्रबंधन समिति:- यह समिति खेल प्रतियोगिता के आयोजन तथा संचालन से सबंधित सभी गतिविधियों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होती है यह समिति लगभग एक माह पूर्व विभिन्न समितियाँ का गठन करती है और उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है।
    2. प्रचार समिति:- किसी भी प्रतियोगिता से 3 से 4 हफ्ते पहले इस समिति का कार्य होता है प्रतियोगिता की तिथि, स्थान प्रतियोगिता के कार्यक्रम के विषय में सूचना प्रसारित करें।
    3. क्रय समिति:- प्रतियोगिता को सफल बनाने में इस समिति का मुख्य कार्य होता है प्रतियोगिता में प्रयोग होने वाली वस्तुओं तथा उपकरणों को प्रतियोगिता से पहले खरीद लेना चाहिये तथा उनका निरिक्षण कर लेना चाहिये।
    4. अधिकारियों के समिति:- प्रतियोगिता से पहले अधिकारी अम्पार्यस, रिकॉर्डस लैप स्कोरर्स आदि का चयन करना।
    5. खेल मैदान व उपकरण समिति:- यह समिति खेल प्रतियोगिता के लिये मैदान को तैयार करती है प्रतियोगिता से लगभग 2 दिन पहले मैदान तैयार हो जाने चाहियें।
    6. प्रतियोगिता कार्यक्रम समिति:- किसी भी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिये ये समिति काफी हद तक जिम्मेदार होती है टीमों की संख्या, फिक्सचर आदि तैयार करके सभी को उपलब्धा कराना ताकि सभी समिति अपना कार्य सही ढंग से कर सकें।
    7. सजावट तथा समारोह समिति:- प्रतियोगिता से पूर्व यह समिति निश्चित करती है कि उसे कहाँ पर कितनी जैसे मैदान, स्टेडियम, मंच पर सजावट की आवश्यकता है।
    8. प्राथमिक चिकित्सा समिति:- प्रतियोगिता के समय चोट लगने पर जिस समान की आवश्यकता होती है प्रतियोगिता से पहले उस समान की व्यवस्था करना इस समिति का पहला कार्य होता है।
    9. वित्तीय समिति:- यह समिति प्रतियोगिता से पूर्व सभी प्रकार के व्यय का लेखा जोखा तैयार करके बजट बना लेती है ताकि प्रतियोगिता में किस प्रकार खर्चा करना है।
    10. परिवहन समितिः- प्रतियोगिता के दौरान किस प्रकार के परिवहन की और कितनी मात्र में आवश्यकता होगी यह समिति इस की रूप रेखा बनाती है।
    11. भोजन तथा आवास समिति:- यह समिति प्रतियोगिता पहले सुनिश्चत करती है कि टीमों को कहाँ ठहराना है खाने की व्यवस्था कहाँ करनी और कितनी लोगों की करनी है लड़के व लड़कियों के रहने की व्यवस्था अलग-अलग करनी होती है सुरक्षा का भी ध्यान रखना इस समिति का कार्य है।
  6. असामान्य/अनियमित मायिक धर्म, “अनियमिता मासिक धर्म का अर्थ है- मासिक धर्म का नियमित अंतराल पर न आना, असाधारण कम रक्त स्राव, माहमारी में दर्द होना।
    कारण:-

    1. बीमारी
    2. आनुवांशिकता
    3. गर्भपात
    4. उच्चचिंता
    5. खान-पान अपोषक भोजन
    6. कमजोरी
    7. अधिक दवाईयों का सेवन
    8. उच्च स्तरीय प्रशिक्षण
  7. अभिप्रेरणा (Motivation) अर्थः वह स्थिति जिसमें व्यक्ति आन्तरिक, एवं बाहरी कारणों से प्रेरित होकर लक्ष्य की ओर लगातार अग्रसर रहता है।
    आन्तरिक अभिप्रेरणा:- (व्यक्ति आन्तरिक शक्तियों से प्रेरित होता है।) जैसे-श्रेष्ठता सिद्ध करना, सामाजिक सम्मान, मनोरंजन, आत्म संतुष्टि
    बाहरी अभिप्रेरणा:- (व्यक्ति बाहरी शक्तियों से प्रेरित होता है।) जैसे-पुरस्कार, दंड, दोषारोपण, प्रशंसा

    अथवा

    व्यायाम के अभ्यास को बढ़ाने के लिए रणनीतियाँ:-
    व्यायाम अनुपालन कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों में विकसित नहीं किया जा सकता। व्यक्ति को व्यायाम अनुपालन के लिए जीवन पर्यन्त व्यायाम करने की नियमित आदत बनाए रखनी चाहिए।
    व्यायाम अनुपालन को बढ़ाने की रणनीतियाँ (तरीके)-

    1. परेशानियों को जानना (To know the difficulties):- यदि खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पा रहा है तो सबसे पहले ये जानना कि बच्चे को क्या परेशानी है, फिर उस समस्या को सुलझा कर ही अभ्यास करवाना चाहिए।
    2. सकारात्मक आत्मवार्तालाप (Positive self talk):- सकारात्मक आत्मवार्तालाप एक ऐसी रणनीति है, जिसका प्रयोग अभ्यास की अनुवती को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। आत्मवार्तालाप की उचित पुनरावृत्ति के मध्यम से खिलाड़ी के मध्यम से खिलाड़ी के विश्वास या विचार प्रणाली को बदला जा सकता है।
    3. स्वस्थ खेल वातावरण (Healthy sports environment):- स्वस्थ खेल वातावरण खिलाड़ियों को अभ्यास करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ खेल वातावरण में अच्छी जलवायु, समतल, साफ एवं स्वच्छ खेल मैदान, उचित मौसम, उचित आर्द्रता, उचित तापमान, अच्छी गुणवत्ता वाले खेल उपकरण व अन्य सुविधाएँ शामिल होती हैं। इस प्रकार के स्वस्थ खेल वातावरण में खिलाड़ी उचित अभ्यास कर सकते हैं तथा प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। स्वस्थ अभ्यास के लिए अभ्यास स्थल के पास किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होना चाहिए।
    4. अभ्यास की अवधि (Length of practice):- किसी भी गतिविधि के लिए खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए अभ्यास की अवधि को सावधानीपूर्वक नियोजित किया जाए। उनकी रुचि जगाने के लिए अभ्यास समय तुलनात्मक रूप से छोटा होना चाहिए तथा सामान्यतया इसमें उनकी प्रारम्भिक स्तर के लीडअप (माइनर खेल) खेल होने चाहिए, क्योंकि इस स्तर पर प्रमुख प्रयोजन स्वैच्छिक और अनौपचारिक अभ्यास में उनको प्रोत्साहित करना है।
    5. पुरस्कार (Rewards):- उपलब्धियों की प्राप्ति भी व्यक्ति को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करती है। खिलाड़ी को अभ्यास करवाने के लिए पुरस्कार देने का वादा करके उसे अभ्यास के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसे व्यक्ति के मन में सकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न होगी।
    6. उपलब्धियों का अभिलेख (Records of achievement):- खिलाड़ीकी उपलब्धि यों का अभिलेख रखकर उसे समय-समय पर उसकी पूर्व उपलब्धियों से अवगत करवाकर भी उसे अभ्यास करने के लिए तैयार कर सकते हैं।
    7. प्रशंसा (Appreciation):- अच्छा अभ्यास करने पर खिलाड़ी की प्रशंसा करके उसे और अधिक अच्छा करने के लिए भी तैयार कर सकते हैं।
    8. प्रगति का ज्ञान (Knowledge of progress):- खिलाड़ियों को समय-समय पर उनकी स्थिति तथा प्रगति के विषय में अवगत करते रहना चाहिए। उन्हें इस बात का पूरा ज्ञान होना चाहिए कि वह जिस लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, उसे वह प्राप्त कर पाएँगें भी या नहीं?
    9. सिखाने का तरीका (Way of training):- अभ्यास को सिखाने का तरीका भी रुचिकर व आसान होना चाहिए ताकि खिलाड़ी अभ्यास आसानी से कर सकें।
    10. मेडिटेशन (ध्यान लगाना) (Meditation):- किसी भी खिलाड़ी व्यक्ति को ध्यान लगवाकर भी हम उसके अन्दर व्यायाम अनुपालन करने की आत्मशक्ति को बढ़वा सकते हैं।
    11. योग के द्वारा (Yoga):- योग के द्वारा भी खिलाड़ी व्यक्ति के शरीर में लचीलापन आ जाता है जिससे वह आसानी से व्यायाम अनुपालन कर सकता है।
    12. समूह में कार्य देकर (Team working):- जब खिलाड़ी व्यक्ति समूह में अभ्यास करता है तो एक-दूसरे को देखकर भी व्यायाम अनुपालन करने की शक्ति बढ़ जाती है। अन्य लोगों का समर्पण देखकर स्वयं को प्रेरित करने का यह अच्छा तरीका है।
  8. परिधि प्रशिक्षण विधि में उच्च तीव्रता वाली ऐरोबिक्स का प्रयोग शरीर अनुकूलित या प्रतिरोध प्रशिक्षण के लिए किया जाता है इसका लक्ष्य शक्ति तथा माँसपेशीय सहनक्षमता बढ़ाना है।
    परिधि प्रशिक्षण एक ऐसी प्रशिक्षण विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।
    उद्देश्य:- परिधि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सहनशीलता शक्ति, लचक और गतिशीलता बढ़ाना है।
    परिधि प्रशिक्षण के लाभ (Advantages of Circuit Training)

    1. परिधि प्रशिक्षण की विधि Indoor या Outdoor भी हो सकती है। वर्षा ऋतु में ___ यह प्रशिक्षण बड़े कमरे में भी किया जा सकता है।
    2. खेल-संबंधी उपकरण आसानी से प्राप्त किए जा सकता है।
    3. यह विधि सीखने में बहुत आसान है। कोई भी खिलाड़ी अपने-आप प्रशिक्षण ले सकता है।
    4. इस प्रशिक्षण को करने से खिलाड़ी बहुत कम समय में अच्छे परिणाम दे सकता है।
    5. प्रशिक्षण की यह विधि बहुत रूचिकर है।
    6. इसमें विभिन्न व्यायामों को करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता नहीं होती।
    7. एक ही समय में बहुत से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
    8. इस विधि में प्रशिक्षण आसानी से प्रशिक्षण को देख सकता है। और उसका निरीक्षण भी कर सकता है।
    9. सीखने वाले खिलाड़ियों की योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण बढ़ाया व घटाया जा सकता है।
    10. शरीर के सभी अंगों का व्यायाम हो सकता है।

खण्ड (स)

  1. खेल चोटों का वर्गीकरण (classification of sports Injuries)
    बाहरी चोटें (External Injuries):- कोमल/मुलायम उत्तक चोटे Softtissue Injuries) 1. रंगड (Abrasion) 2. गुमचोट (Contusion) 3. विदारण (Laceration) 4. चीरा (Incision)
    आंतरिक चोटें Internal Injuries):-
    कोमल/मुलायम उत्तक Softtissue Injuries-मोच (Sprain) fogla (Stress)
    कठोर उत्तक चोटे Hard tissue Injuries-अस्थिभंग (fracture) तनाव अस्थिभंग
    प्राइस प्रक्रिया की विधि:-

    1. सुरक्षा:- चोटग्रस्त हिस्से को तुरंत सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए ताकि दोबारा उसी स्थान पर चोट न लगे।
    2. आराम:- चोटग्रस्त हिस्से को बिल्कुल हिलाना नहीं चाहिए तथा उसे पूरा आराम देना चाहिए। पर्याप्त आराम चोट को जल्दी ठीक करने में सहायक होते हैं।
    3. बर्फ:- चोटग्रस्त हिस्से पर बर्फ का प्रयोग करना चाहिए ताकि रक्तस्राव और सूजन को कम किया जा सके। इससे दर्द में भी आराम मिलता है। बर्फ का प्रयोग एक बार में 15 से 20 मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए। एक दिन में बर्फ का प्रयोग 4 से 8 बार करना चाहिए। यदि त्वचा का रंग दिखाई देता है तो इसका अर्थ है कि बर्फ का प्रयोग ज्यादा लंबा किया है।
    4. दबाव:- चोटग्रस्त हिस्से के आसपास एक मजबूत पैड लगाकर उस पर स्ट्रैप इस प्रकार लगाना चाहिए। कि चोटिल क्षेत्र में दबाव अधिक न हो और रक्तप्रवाह बाधित हो जाए।
    5. ऊपर उठाना:- चोटग्रस्त हिस्से को तकिए के ऊपर तथा हृदय के स्तर से थोड़ा ऊपर की ओर रखना चाहिए तकि सूजन कम हो सकें।
  2. हृदय वाहिका संस्थान पर व्यायाम से पड़ने वाले तत्कालिक प्रभावः-
    1. हृदय गति का बढ़ना (Increase Heart Rate):- जब कोई व्यक्ति व्यायाम करना प्रारम्भ करता है तो व्यायाम की प्रबलता के अनुरूप ही हृदय की गति बढ़ जाती है।
    2. स्ट्रोक आयतन में वृद्धि:- व्यायाम की तीव्रता तथा अवधि के बढ़ने के अनुरूप ही प्रत्येक धड़कन पर हृदय के बाएँ निलय से निकलने वाले रक्त की मात्रा (Stroke Volume) में वृद्धि होती है।
    3. रक्त का आयतन:- व्यायाम की तीव्रता तथा अवधि के अनुरूप ही हृदय द्वारा प्रति मिनट पम्प किए गए रक्त के आयतन (Cardiac Volume) में भी वृद्धि होती है।
    4. ऊतकों को रक्त की आपूर्ति बढ़ाना:- ऑक्सीजन की तत्काल आवश्यकता होती है तो हृदयवाहिनी संस्थान उन ऊतकों में रक्त के बहाव को बढ़ा देती है बल्कि जिनमें कम आवश्यकता होती है उनमें कम कर देता है।
    5. रक्त चाप में वृद्धि:- रक्त की आपूर्ति के कारण, रक्तचाप में वृद्धि होती है।
    अथवा

    इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी व्यक्तित्व को आंकने के लिये 5 बड़े लक्षणों का आंकलन करना चाहिए। ये 5 बड़े लक्षण निम्नलिखित है:-

    1. स्पष्टता सम्बन्धी लक्षण:- स्पष्टता सम्बन्धी लक्षण का आकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना
      – काल्पनाशील
      – व्यवहारिक
      – विभिन्न विषयों में रूचि रखने वाला – कितनी बौद्धिक जिज्ञासा रखने वाला
      – रचानात्मक – नये अनुभवों का आनंद लेने वाला
      – नये विषयों को सीखने में योग्य है
    2. कर्तव्यनिष्टता सम्बन्धी लक्षणः- कर्तव्यनिष्टता सम्बन्धी लक्षण का आकलन यह दर्शाता है कि
      – व्यक्ति कितना जीवन की चुनौतियों का समना करने में सक्षम है
      – कितना आत्म अनुशासित है
      – कितना कृतव्यनिष्ट है
      – कितना योजना बद्ध कार्य करता है।
      – कितना प्रबन्धन कला में कुशल है।
      – दूसरों पर कितना निर्भर है
      – कितना कठोर परिश्रमी है
      – कितना महत्वकांशी है
    3. बहिमुर्खता:- इस लक्षण का आंकलन यह दर्शाता है कि व्यक्ति कितना-
      – ऊर्जावान है
      – कितनी सकारात्मक भावना रखता है।
      – कितनी स्वीकारने की क्षमता रखता है।
      – कितनी मिलनसार है।
      – कितना बातें करने में निपुण है
      – कितना जिंदादिल – कितना स्नेहपूर्ण व्यवहार रखता है।
      – कितना मित्रतापूर्ण व्यवहार रखता है।
    4. सहमतता सम्बन्धी लक्षणः- इस लक्षण का आकलन यह दर्शाता है कि
      – व्यक्ति कितना उदार है
      – कितना दूसरो को सहयोग करने वाला है
      – कितना व्यवस्थित रूप से कार्य करने वाला है।
      – कितना मित्रतापूर्ण है।
    5. मनोविक्षुब्धता सम्बन्धी लक्षण:- इस लक्षण का आकलन यह दर्शाता है कि
      – व्यक्ति कितना गुस्सा करने वाला
      – कितना अवसाद में रहने वाला अथवा अवसाद पर उसका नियन्त्रण कितना है
      – कितना चिंतित
      – कितना भावनाओं पर नियंत्रण रख सकता है
  3. 1. कुर्सी के द्वारा निचले भाग की शक्ति मापन टेस्ट 1. शरीर अंग शारीरिक क्षमता के घटक-निचले भाग की शक्ति तथा सहनशीलता
    2. बाजू मोड़ने का परीक्षण 2. शरीर के ऊपरी भाग की शक्ति
    3. कुर्सी पर बैठना और पहुँचने का परीक्षण 3. वरिष्ठ नागरिक की शारीरिक क्षमता तथा लचीलापन-पैरो व कमर का लचीलापन
    4. बैंक-स्ट्रेच परीक्षण ऊपरी भाग के लचीलेपन के लिए 4. ऊपर भाग का लचीलापन तथा (कंधे) के जोड़ का मापन
    5. आठ फुट एण्ड गो परीक्षण 5. चलते समय गति, सन्तुलन तथा स्फूर्ती का मूल्यांकन
    6. छः मिनट चाल परीक्षण 6. एरोबिक पुष्टि या एरोबिक सहन क्षमता का मुल्याकंन
    अथवा

    भारत में खेलों में महिलाओं की भागीदारी के लिए निम्न सुझाव है।

    1. महिलाओं को खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरणा व प्रेरित करना,
    2. परिवार तथा समाज का सहयोग,
    3. महिलाओं के लिए शिविर, सेमिनार व कार्यशाला का आयोजन,
    4. ज्ञान अर्जित करना तथा दूरसंचार (media) की भागीदारी बढ़ाना,
    5. प्राथमिक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी तथा प्रशिक्षण करना,
    6. अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करवाना,
    7. महिलाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण का प्रबंध करना,
    8. खेलों में प्रतियोगिता के अवसर उपलब्ध करवाना,
    9. नई वैज्ञानिक तकनीकी सामान व साधन का प्रबधन करना,
    10. खेलों में प्रतियोगिता के अवसर उपलब्ध करवाना,
    11. सन्तुलित व स्वस्थ भोजन का प्रबंधन करना,
    12. अच्छे व प्रेरित छात्रवृति व पुरस्कारों को देना,
    13. सांस्कृतिक व सामाजिक नकारात्मक पहलू को दूर करना,
    14. अभिवृत्ति व सामाजिक बाधाओं को ग्रामीण स्तर पर दूर करना,
    15. सामाजिक समानताओं को बनाना,
    16. आत्मविश्वास का विकास,
    17. वित्तीय सहायता,
    18. रोजगार और कैरियर,
    19. सरकारी नीतियों का निर्माण व लागू करना।
  4. नॉक आउट के आधार पर 23 टीमों के लिए फिक्चसर
    टीमों की सं. = 23
    कुल मैचों की सं = टीमों की सं-1
    = 23 – 1 = 22
    कुल चक्र (Round) टीमों की सं. = 25 23 = 5
    दाई की स. = 32-23
    वरिष्ठ अर्ध- upper half =n122312=11=n−12⇒23−12=11 (विजेता टीम)
    कनिष्ठ अर्ध = Lower half =n+12=23112=12=n+12=231−12=12
    बाईं की सं. = 32 -23 = 9
    वरिष्ठ अर्ध =B+12a+12=102=5=B+12⇒a+12=102=5
    कनिष्ठ अर्ध =B12=a12=82=4=B−12=a−12=82=4
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